अथर्ववेदAtharvavedaAV 11.9

शत्रु-सेना के विनाश की प्रार्थनाSpell for destroying enemy armies

नीचे के भावार्थ AI से बने हैं और समीक्षा बाकी है।The meanings below are AI-generated and await review.

  1. १

    ये बाहवो या इषवो धन्वनां वीर्या᳙णि च ।असीन् परशून् आयुधं चित्ताकूतं च यद् धृदि ।सर्वं तद् अर्बुदे त्वम् अमित्रेभ्यो दृशे कुरूदारांश् च प्र दर्शय

    जो भुजाएँ हैं, जो बाण हैं, धनुषों का जो बल है, तलवारें, फरसे, शस्त्र, और हृदय में जो विचार और संकल्प है—हे अर्बुदि, वह सब तुम शत्रुओं को दिखाओ, और उन्हें 'उदार' भी दिखाओ।

    Whatever arms, arrows and power of bows there are, swords, axes, weapons, and the thought and intent in the heart: Arbudi, make all of it visible to the enemies, and show them the udāras.

  2. २

    उत् तिष्ठत सं नह्यध्वं मित्रा देवजना यूयम् ।संदृष्टा गुप्ता वः सन्तु या नो मित्राण्य् अर्बुदे

    उठो, कमर कसो, तुम मित्र देवजनो! हे अर्बुदि, जो हमारे मित्र हैं, वे तुम्हारी दृष्टि में और तुम्हारी रक्षा में रहें।

    Rise up and arm yourselves, you allies, you divine folk! Arbudi, let those who are our allies be watched over and protected by you.

  3. ३

    उत् तिष्ठतम् आ रभेताम् आदानसंदानाभ्याम् ।अमित्राणां सेना अभि धत्तम् अर्बुदे

    तुम दोनों उठो, पकड़ने और बाँधने के साधनों से काम आरम्भ करो; हे अर्बुदि, शत्रुओं की सेनाओं पर टूट पड़ो।

    Rise up, you two, and set to work with seizing and binding; Arbudi, fall upon the armies of the enemies.

  4. ४

    अर्बुदिर् नाम यो देव ईशानश् च न्य᳙र्बुदिः ।याभ्याम् अन्तरिक्षम् आवृतम् इयं च पृथिवी मही ।ताभ्याम् इन्द्रमेदिभ्याम् अहं जितम् अन्व् एमि सेनया

    अर्बुदि नाम का जो देव है और स्वामी न्यर्बुदि, जिन दोनों ने अन्तरिक्ष और इस विशाल पृथ्वी को घेर रखा है—इन्द्र के उन दोनों साथियों के साथ मैं अपनी सेना लेकर जीते हुए (शत्रु) का पीछा करता हूँ।

    The god named Arbudi and the lord Nyarbudi, who between them enclose the mid-air and this great earth: with these two allies of Indra I follow up the conquered with my army.

  5. ५

    उत् तिष्ठ त्वं देवजनार्बुदे सेनया सह ।भञ्जन्न् अमित्राणां सेनां भोगेभिः परि वारय

    हे देवजन अर्बुदि, अपनी सेना के साथ उठो; शत्रुओं की सेना को तोड़ते हुए उसे अपनी कुण्डलियों से घेर लो।

    Rise up, Arbudi, divine one, with your army; break the enemies' army and surround it with your coils.

  6. ६

    सप्त जातान् न्य᳙र्बुद उदाराणां समीक्षयन् ।तेभिष् ट्वम् आज्ये हुते सर्वैर् उत् तिष्ठ सेनया

    हे न्यर्बुदि, उदारों के सात जन्मे हुओं को दिखाते हुए, घी की आहुति दी जाने पर उन सबके साथ तुम अपनी सेना लेकर उठो।

    Nyarbudi, making the seven born of the udāras look on, rise up with all of them and with your army once the ghee has been offered.

  7. ७

    प्रतिघ्नानाश्रुमुखी कृधुकर्णी च क्रोशतु ।विकेशी पुरुषे हते रदिते अर्बुदे तव

    हे अर्बुदि, तुम्हारे डँसने पर, जब उसका पुरुष मारा जाए, तो छाती पीटती, आँसू-भरे मुख वाली, कटे कानों वाली, बिखरे केशों वाली स्त्री विलाप करे।

    When you have bitten, Arbudi, and her man is slain, let the woman beat her breast and wail, tear-faced, with mutilated ears and dishevelled hair.

  8. ८

    संकर्षन्ती करूकरं मनसा पुत्रम् इछन्ती ।पतिं भ्रातरम् आत् स्वान् रदिते अर्बुदे तव

    हे अर्बुदि, तुम्हारे डँसने पर वह 'करूकर' को घसीटती हुई, मन से पुत्र, पति, भाई और अपने लोगों को चाहती हुई (विलाप करे)।

    When you have bitten, Arbudi, let her, dragging the karūkara, long in her mind for her son, her husband, her brother and her own people.

  9. ९

    अलिक्लवा जाष्कमदा ग्ŕ̥ध्राः श्येनाः पतत्रिणः ।ध्वाङ्क्षाः शकुनयस् तृप्यन्त्व् अमित्रेषु समीक्षयन् रदिते अर्बुदे तव

    हे अर्बुदि, तुम्हारे डँसने पर अलिक्लव, जाष्कमद, गिद्ध, बाज़, पक्षी, कौए और शकुन शत्रुओं पर तृप्त हों, (शत्रु यह) देखते रहें।

    When you have bitten, Arbudi, let the aliklavas, jāṣkamadas, vultures, hawks, winged birds, crows and carrion birds feed full on the enemies, while they are made to look on.

  10. १०

    अथो सर्वं श्वापदं मक्षिका तृप्यतु क्रिमिः ।पौरुषेये ऽधि कुणपे रदिते अर्बुदे तव ॥१०॥ {२५}

    और हे अर्बुदि, तुम्हारे डँसने पर हर हिंसक पशु, मक्खी और कीड़ा मनुष्य के शव पर तृप्त हो।

    And when you have bitten, Arbudi, let every beast of prey, the fly and the worm feed full on the human corpse.

  11. ११

    आ गृह्णीतं सं बृहतं प्राणापानान् न्यर्बुदे ।निवाशा घोषाः सं यन्त्व् अमित्रेषु समीक्षयन् रदिते अर्बुदे तव

    हे न्यर्बुदि, (शत्रुओं के) प्राण और अपान को पकड़ो और उखाड़ दो; हे अर्बुदि, तुम्हारे डँसने पर शत्रुओं में विलाप की ध्वनियाँ उठें।

    Seize and tear out their in-breaths and out-breaths, Nyarbudi; when you have bitten, Arbudi, let wailing cries rise up together among the enemies.

  12. १२

    उद् वेपय सं विजन्तां भियामित्रान्त् सं सृज ।उरुग्राहैर् बाह्वङ्कैर् विध्यामित्रान् न्यर्बुदे

    (शत्रुओं को) कँपा दो, वे काँप उठें; शत्रुओं को भय से भर दो; हे न्यर्बुदि, चौड़ी पकड़ वाली भुजाओं के आलिंगन से शत्रुओं को बेध दो।

    Make them quake, let them shudder; fill the enemies with fear; Nyarbudi, pierce the enemies with wide-gripping arm-clasps.

  13. १३

    मुह्यन्त्व् एषां बाहवश् चित्ताकूतं च यद् धृदि ।मैषाम् उच् छेषि किं चन रदिते अर्बुदे तव

    इनकी भुजाएँ और हृदय में जो विचार और संकल्प है, वह मोहित हो जाए; हे अर्बुदि, तुम्हारे डँसने पर इनका कुछ भी शेष न बचे।

    Let their arms be confounded, and the thought and intent in their hearts; when you have bitten, Arbudi, let nothing of them be left.

  14. १४

    प्रतिघ्नानाः सं धावन्तूरः पटौराव् आघ्नानाः ।अघारिणीर् विकेश्यो᳙ रुदत्यः᳙ पुरुषे हते रदिते अर्बुदे तव

    हे अर्बुदि, तुम्हारे डँसने पर, जब पुरुष मारा जाए, तब छाती और 'पटौर' पीटती, बिना तेल लगाए बिखरे केशों वाली, रोती स्त्रियाँ इकट्ठी दौड़ें।

    When you have bitten, Arbudi, and the man is slain, let the women run together, beating themselves, striking breast and paṭauras, unanointed, hair loose, weeping.

  15. १५

    श्व᳙न्वतीर् अप्सरसो रूपका उतार्बुदे ।अन्तःपात्रे रेरिहतीं रिशां दुर्णिहितैषिणीम् ।सर्वास् ता अर्बुदे त्वम् अमित्रेभ्यो दृशे कुरूदारांश् च प्र दर्शय

    हे अर्बुदि, कुत्तों वाली अप्सराएँ और रूपक, भीतरी पात्र में चाटती हुई, बुरी तरह रखी वस्तु खोजने वाली 'रिशा'—हे अर्बुदि, इन सबको तुम शत्रुओं को दिखाओ, और उन्हें उदार भी दिखाओ।

    The apsarases with their dogs, and the rūpakas, Arbudi; the riśā who licks inside the vessel and seeks what is badly put away: Arbudi, show all of them to the enemies, and show them the udāras.

  16. १६

    खडूरे ऽधिचङ्क्रमां खर्विकां खर्ववासिनीम् ।य उदारा अन्तर्हिता गन्धर्वाप्सरसश् च ये ।सर्पा इतरजना रक्षांसि

    'खडूर' पर घूमने वाली, 'खर्व' में रहने वाली खर्विका, जो छिपे हुए उदार हैं, और जो गन्धर्व और अप्सराएँ हैं, सर्प, इतरजन, राक्षस—

    She who roams upon the khaḍūra, the kharvikā who lives in the kharva, the hidden udāras, the gandharvas and apsarases, serpents, other folk, demons—

  17. १७

    चतुर्दंष्ट्रां छ्यावदतः कुम्भमुष्काꣳ असृङ्मुखान् ।स्वभ्यसा ये चोद्भ्यसाः

    चार दाँतों वाली, काले दाँतों वाले, घड़े जैसे अण्डकोष वाले, रक्त-भरे मुख वाले, और जो 'स्वभ्यस' और 'उद्भ्यस' हैं—

    The four-tusked one, the black-toothed, the pot-testicled, the blood-mouthed, and those who are svabhyasa and udbhyasa—

  18. १८

    उद् वेपय त्वम् अर्बुदे ऽमित्राणाम् अमूः सिचः ।जयंश् च जिष्णुश् चामित्रां जयताम् इन्द्रमेदिनौ

    हे अर्बुदि, शत्रुओं की उन 'सिच्' को तुम कँपा दो; इन्द्र के दोनों साथी 'जयन्' और 'जिष्णु' शत्रुओं को जीतें।

    Arbudi, make those flanks of the enemies quake; let Conquering and Victorious, the two allies of Indra, conquer the enemies.

  19. १९

    प्रब्लीनो मृदितः शयां हतो᳙ ऽमित्रो न्यर्बुदे ।अग्निजिह्वा धूमशिखा जयन्तीर् यन्तु सेनया

    हे न्यर्बुदि, शत्रु कुचला, रौंदा और मारा हुआ पड़ा रहे; अग्नि-जिह्वा और धुएँ की शिखा वाली (शक्तियाँ) सेना के साथ विजय करती हुई चलें।

    Nyarbudi, let the enemy lie crushed, trampled and slain; let the fire-tongued, smoke-crested ones go conquering with the army.

  20. २०

    तयार्बुदे प्रणुत्तानाम् इन्द्रो हन्तु वरंवरम् ।अमित्राणां शचीपतिर् मामीषां मोचि कश् चन ॥२०॥ {२६}

    हे अर्बुदि, उस (सेना) द्वारा खदेड़े गए शत्रुओं में से शचीपति इन्द्र एक-एक श्रेष्ठ को मारें; इनमें से कोई भी न छूटे।

    Arbudi, of the enemies driven off by that army, let Indra, lord of power, kill every one of the best; let none of them get away.

  21. २१

    उत् कसन्तु ह्ŕ̥दयान्य् ऊर्ध्वः प्राण उद् ईषतु ।शौष्कास्यम् अनु वर्तताम् अमित्रान् मोत मित्रिणः

    (शत्रुओं के) हृदय उछल कर फटें, प्राण ऊपर को निकल जाएँ; मुख का सूखना शत्रुओं के पीछे लगे, मित्रों के नहीं।

    Let their hearts burst upward, let the breath rise and leave; let dryness of mouth come upon the enemies, not upon our allies.

  22. २२

    ये च धीरा ये चाधीराः पराञ्चो बधिराश् च ये ।तमसा ये च तूपरा अथो बस्ताभिवासिनः ।सर्वांस् ताꣳ अर्बुदे त्वम् अमित्रेभ्यो दृशे कुरूदारांश् च प्र दर्शय

    जो धीर हैं और जो अधीर हैं, जो मुँह फेरे हैं और जो बहरे हैं, जो अन्धकार में हैं और बिना सींग के हैं, और जो बकरे का आवरण ओढ़े हैं—हे अर्बुदि, इन सबको तुम शत्रुओं को दिखाओ, और उन्हें उदार भी दिखाओ।

    The steady and the unsteady, those turned away and the deaf, those in darkness and the hornless, and those covered like he-goats: Arbudi, show all of them to the enemies, and show them the udāras.

  23. २३

    अर्बुदिश् च त्रिषन्धिश् चामित्रान् नो वि विध्यताम् ।यथैषाम् इन्द्र वृत्रहन् हनाम शचीपते ऽमित्राणां सहस्रशः

    अर्बुदि और त्रिषन्धि हमारे शत्रुओं को बेध दें, ताकि हे वृत्रहन्, शचीपति इन्द्र, हम इन शत्रुओं को हज़ारों की संख्या में मारें।

    Let Arbudi and Trishandhi pierce our enemies, so that, Indra, slayer of Vritra, lord of power, we may kill these enemies by the thousand.

  24. २४

    वनस्पतीन् वानस्पत्यान् ओषधीर् उत वीरुधः ।गन्धर्वाप्सरसः सर्पान् देवान् पुण्यजनान् पितॄ᳓न् ।सर्वांस् ताꣳ अर्बुदे त्वम् अमित्रेभ्यो दृशे कुरूदारांश् च प्र दर्शय

    वनस्पतियाँ, वृक्षों से उत्पन्न वस्तुएँ, ओषधियाँ और लताएँ, गन्धर्व और अप्सराएँ, सर्प, देव, पुण्यजन, पितर—हे अर्बुदि, इन सबको तुम शत्रुओं को दिखाओ, और उन्हें उदार भी दिखाओ।

    Trees and what comes from trees, herbs and plants, gandharvas and apsarases, serpents, gods, puṇyajanas, the Fathers: Arbudi, show all of them to the enemies, and show them the udāras.

  25. २५

    ईशां वो मरुतो देव आदित्यो ब्रह्मणस्पतिः ।ईशां व इन्द्रश् चाग्निश् च धाता मित्रः प्रजापतिः ।ईशां व ŕ̥षयश् चक्रुर् अमित्रेषु समीक्षयन् रदिते अर्बुदे तव

    तुम पर मरुतों, देव आदित्य और ब्रह्मणस्पति ने शासन किया है; तुम पर इन्द्र, अग्नि, धाता, मित्र और प्रजापति ने शासन किया है; हे अर्बुदि, तुम्हारे डँसने पर ऋषियों ने भी तुम पर शासन किया है, (शत्रु यह) देखते रहें।

    The Maruts, the god Aditya and Brahmanaspati have held mastery over you; Indra and Agni, Dhatri, Mitra and Prajapati have held mastery over you; the seers have held mastery over you, while the enemies are made to look on, when you have bitten, Arbudi.

  26. २६

    तेषां सर्वेषाम् ईशाना उत् तिष्ठत सं नह्यध्वम् ।मित्रा देवजना यूयम् इमं संग्रामं संजित्य यथालोकं वि तिष्ठध्वम् ॥२६॥ {२७}

    उन सबके स्वामियो, उठो, कमर कसो; तुम मित्र देवजन इस संग्राम को जीतकर अपने-अपने लोक को चले जाओ।

    You who are lords over all of them, rise up and arm yourselves; you allies, you divine folk, once you have won this battle, go back each to your own world.