अथर्ववेदAtharvavedaAV 10.9
शतौदना गौ का दानGift of the Śataudanā cow
नीचे के भावार्थ AI से बने हैं और समीक्षा बाकी है।The meanings below are AI-generated and await review.
- १
अघायताम् अपि नह्या मुखानि सपत्नेषु वज्रम् अर्पयैतम् ।इन्द्रेण दत्ता प्रथमा शतौदना भ्रातृव्यघ्नी यजमानस्य गातुः
बुरा चाहने वालों के मुँह बाँध दो, शत्रुओं पर यह वज्र चला दो। इन्द्र की दी हुई पहली शतौदना शत्रुओं को मारने वाली है और यजमान का मार्ग है।
Bind up the mouths of those who wish us harm; hurl this vajra at our rivals. The first Śataudanā, given by Indra, is slayer of rivals and the sacrificer's way forward.
- २
वेदिष् टे चर्म भवतु बर्हिर् लोमानि यानि ते ।एषा त्वा रशनाग्रभीद् ग्रावा त्वैषो ऽधि नृत्यतु
(शतौदना से:) तुम्हारी खाल वेदि बने, और तुम्हारे जो रोएँ हैं वे बर्हि (कुश) बनें। इस रस्सी ने तुम्हें पकड़ लिया है; यह पत्थर (ग्रावा) तुम पर नाचे।
(To the Śataudanā cow:) Let your hide be the vedi (altar), and your hairs the barhis (strewn grass). This cord has caught hold of you; let this stone dance upon you.
- ३
बालास् ते प्रोक्षणीः सन्तु जीह्वा सं मार्ष्टु अघ्न्ये ।शुद्धा त्वं यज्ञिया भूत्वा दिवं प्रेहि शतौदने
हे अघ्न्या, तुम्हारी पूँछ के बाल छिड़कने का जल बनें, जीभ तुम्हें साफ़ करे। हे शतौदना, शुद्ध और यज्ञ के योग्य होकर स्वर्ग को जाओ।
Let your tail-hairs be the sprinkling waters; let the tongue wipe you clean, inviolable one. Made pure and fit for sacrifice, go forth to heaven, Śataudanā.
- ४
यः शतौदनां पचति कामप्रेण स कल्पते ।प्रीता ह्य् अ᳙स्य ऋत्विजः सर्वे यन्ति यथायथम्
जो शतौदना को पकाता है, वह कामनाएँ पूरी करने वाले फल का अधिकारी होता है। क्योंकि उसके सभी ऋत्विज संतुष्ट होकर अपने-अपने स्थान को जाते हैं।
Whoever cooks the Śataudanā is furnished with what fulfils desire, for all his priests go away satisfied, each to his own place.
- ५
स स्वर्गम् आ रोहति यत्रादस् त्रिदिवं दिवः ।अपूपनाभिं कृत्वा यो ददाति शतौदनाम्
वह स्वर्ग पर चढ़ता है, जहाँ आकाश का वह तीसरा लोक (त्रिदिव) है, जो शतौदना को अपूप (पुए) की नाभि वाली बनाकर दान करता है।
He climbs to the heavenly world, where the third heaven of the sky lies, who gives the Śataudanā after making it with a navel of cake.
- ६
स तांल् लोकान्त् सम् आप्नोति ये दिव्या ये च पार्थिवाः ।हिरण्यज्योतिषं कृत्वा यो ददाति शतौदनाम्
वह उन सभी लोकों को प्राप्त करता है जो दिव्य हैं और जो पार्थिव हैं, जो शतौदना को स्वर्ण की ज्योति वाली बनाकर दान करता है।
He wins all those worlds, both heavenly and earthly, who gives the Śataudanā after giving it a light of gold.
- ७
ये ते देवि शमितारः पक्तारो ये च ते जनाः ।ते त्वा सर्वे गोप्स्यन्ति मैभ्यो भैषीः शतौदने
हे देवी, तुम्हारे जो शमिता (वध करने वाले) हैं और जो लोग तुम्हें पकाने वाले हैं, वे सब तुम्हारी रक्षा करेंगे। हे शतौदना, उनसे मत डरो।
Goddess, your slaughterers and the people who cook you will all protect you. Do not be afraid of them, Śataudanā.
- ८
वसवस् त्वा दक्षिणत उत्तरान् मरुतस् त्वा ।आदित्याः पश्चाद् गोप्स्यन्ति साग्निष्टोमम् अति द्रव
वसु दक्षिण से, मरुत उत्तर से और आदित्य पश्चिम से तुम्हारी रक्षा करेंगे। ऐसी होकर तुम अग्निष्टोम (सोमयाग) से भी आगे बढ़ जाओ।
The Vasus will guard you from the south, the Maruts from the north, the Adityas from the west. So protected, outrun the agnishtoma (soma sacrifice).
- ९
देवाः पितरो मनुष्या᳙ गन्धर्वाप्सरसश् च ये ।ते त्वा सर्वे गोप्स्यन्ति सातिरात्रम् अति द्रव
देव, पितर, मनुष्य और जो गन्धर्व व अप्सराएँ हैं, वे सब तुम्हारी रक्षा करेंगे। ऐसी होकर तुम अतिरात्र (सोमयाग) से भी आगे बढ़ जाओ।
The gods, the fathers, humans, and the gandharvas and apsarases will all protect you. So protected, outrun the atiratra (soma sacrifice).
- १०
अन्तरिक्षं दिवं भूमिम् आदित्यान् मरुतो दिशः ।लोकान्त् स सर्वान् आप्नोति यो ददाति शतौदनाम् ॥१०॥ {३०}
अन्तरिक्ष, द्युलोक, भूमि, आदित्य, मरुत, दिशाएँ: वह इन सब लोकों को प्राप्त करता है जो शतौदना का दान करता है।
The midspace, the sky, the earth, the Adityas, the Maruts, the quarters: he wins all these worlds who gives the Śataudanā.
- ११
घृतं प्रोक्षन्ती सुभगा देवी देवान् गमिष्यति ।पक्तारम् अघ्न्ये मा हिंसीर् दिवं प्रेहि शतौदने
घी छिड़कती हुई यह सौभाग्यशाली देवी देवताओं के पास जाएगी। हे अघ्न्या, पकाने वाले की हिंसा न करना; हे शतौदना, स्वर्ग को जाओ।
Sprinkling ghee, the fortunate goddess will go to the gods. Do not harm the one who cooks you, inviolable one; go forth to heaven, Śataudanā.
- १२
ये देवा दिविषदो अन्तरिक्षसदश् च ये ये चेमे भूम्याम् अधि ।तेभ्यस् त्वं धुक्ष्व सर्वदा क्षीरं सर्पिर् अथो मधु
जो देव द्युलोक में रहते हैं, जो अन्तरिक्ष में रहते हैं और जो यहाँ भूमि पर हैं, उनके लिए तुम सदा दूध, घी और मधु दुहो।
For the gods who dwell in the sky, those who dwell in the midspace, and those here on earth, yield milk, ghee and honey always.
- १३
यत् ते शिरो यत् ते मुखं यौ कर्णौ ये च ते हनू ।आमिक्षां दुह्रतां दात्रे क्षीरं सर्पिर् अथो मधु
तुम्हारा जो सिर है, जो मुख है, जो दोनों कान हैं और जो दोनों जबड़े हैं, वे दाता के लिए आमिक्षा, दूध, घी और मधु दुहें।
Your head, your mouth, your two ears and your jaws: let them yield to the giver curds, milk, ghee and honey.
- १४
यौ त ओष्ठौ ये नासिके ये श्ŕ̥ङ्गे ये च ते ऽक्षिणी ।आमिक्षां दुह्रतां दात्रे क्षीरं सर्पिर् अथो मधु
तुम्हारे जो दोनों होंठ हैं, जो नथुने हैं, जो सींग हैं और जो आँखें हैं, वे दाता के लिए आमिक्षा, दूध, घी और मधु दुहें।
Your two lips, your nostrils, your horns and your eyes: let them yield to the giver curds, milk, ghee and honey.
- १५
यत् ते क्लोमा यद् ध्ŕ̥दयं पुरीतत् सहकण्ठिका ।आमिक्षां दुह्रतां दात्रे क्षीरं सर्पिर् अथो मधु
तुम्हारा जो क्लोमा है, जो हृदय है, और कण्ठ के साथ जो पुरीतत् है, वे दाता के लिए आमिक्षा, दूध, घी और मधु दुहें।
Your lungs, your heart, your pericardium together with the windpipe: let them yield to the giver curds, milk, ghee and honey.
- १६
यत् ते यकृद् ये मतस्ने यद् आन्त्रम् याश् च ते गुदाः ।आमिक्षां दुह्रतां दात्रे क्षीरं सर्पिर् अथो मधु
तुम्हारा जो यकृत् है, जो दोनों मतस्ने हैं, जो आँत है और जो गुदा-भाग हैं, वे दाता के लिए आमिक्षा, दूध, घी और मधु दुहें।
Your liver, your two kidneys, your entrails and your rectal parts: let them yield to the giver curds, milk, ghee and honey.
- १७
यस् ते प्लाशिर् यो वनिष्ठुर् यौ कुक्षी यच् च चर्म ते ।आमिक्षां दुह्रतां दात्रे क्षीरं सर्पिर् अथो मधु
तुम्हारा जो प्लाशि है, जो वनिष्ठु है, जो दोनों कोख हैं और जो तुम्हारी खाल है, वे दाता के लिए आमिक्षा, दूध, घी और मधु दुहें।
Your plāśi, your vaniṣṭhu, your two flanks and your hide: let them yield to the giver curds, milk, ghee and honey.
- १८
यत् ते मज्जा यद् अस्थि यन् मंसं यच् च लोहितम् ।आमिक्षां दुह्रतां दात्रे क्षीरं सर्पिर् अथो मधु
तुम्हारी जो मज्जा है, जो हड्डी है, जो मांस है और जो रक्त है, वे दाता के लिए आमिक्षा, दूध, घी और मधु दुहें।
Your marrow, your bone, your flesh and your blood: let them yield to the giver curds, milk, ghee and honey.
- १९
यौ ते बाहू ये दोषणी याव् अंसौ या च ते ककुत् ।आमिक्षां दुह्रतां दात्रे क्षीरं सर्पिर् अथो मधु
तुम्हारी जो दोनों बाहें (अगली टाँगें) हैं, जो दोनों दोषणी हैं, जो दोनों कंधे हैं और जो कूबड़ है, वे दाता के लिए आमिक्षा, दूध, घी और मधु दुहें।
Your two forelegs, your two upper forelegs, your two shoulders and your hump: let them yield to the giver curds, milk, ghee and honey.
- २०
यास् ते ग्रीवा ये स्कन्धा याः पृष्टीर् याश् च पर्शवः ।आमिक्षां दुह्रतां दात्रे क्षीरं सर्पिर् अथो मधु ॥२०॥ {३१}
तुम्हारे जो गर्दन के भाग हैं, जो कंधे के भाग हैं, जो रीढ़ के जोड़ हैं और जो पसलियाँ हैं, वे दाता के लिए आमिक्षा, दूध, घी और मधु दुहें।
Your neck-parts, your shoulder-parts, your vertebrae and your ribs: let them yield to the giver curds, milk, ghee and honey.
- २१
यौ त उरू अष्ठीवन्तौ ये श्रोणी या च ते भसत् ।आमिक्षां दुह्रतां दात्रे क्षीरं सर्पिर् अथो मधु
तुम्हारी जो दोनों जाँघें हैं, जो दोनों घुटने हैं, जो दोनों कूल्हे हैं और जो पिछला भाग है, वे दाता के लिए आमिक्षा, दूध, घी और मधु दुहें।
Your two thighs, your two knees, your hips and your rump: let them yield to the giver curds, milk, ghee and honey.
- २२
यत् ते पुछं ये ते बाला यद् ऊधो ये च ते स्तनाः ।आमिक्षां दुह्रतां दात्रे क्षीरं सर्पिर् अथो मधु
तुम्हारी जो पूँछ है, जो पूँछ के बाल हैं, जो थन है और जो थन के सिरे हैं, वे दाता के लिए आमिक्षा, दूध, घी और मधु दुहें।
Your tail, your tail-hairs, your udder and your teats: let them yield to the giver curds, milk, ghee and honey.
- २३
यास् ते जङ्घाः याः कुष्ठिका ऋछरा ये च ते शफाः ।आमिक्षां दुह्रतां दात्रे क्षीरं सर्पिर् अथो मधु
तुम्हारी जो पिंडलियाँ हैं, जो कुष्ठिका हैं, जो ऋछरा हैं और जो खुर हैं, वे दाता के लिए आमिक्षा, दूध, घी और मधु दुहें।
Your shanks, your kuṣṭhikās, your ṛcharās and your hooves: let them yield to the giver curds, milk, ghee and honey.
- २४
यत् ते चर्म शतौदने यानि लोमान्य् अघ्न्ये ।आमिक्षां दुह्रतां दात्रे क्षीरं सर्पिर् अथो मधु
हे शतौदना, तुम्हारी जो खाल है; हे अघ्न्या, तुम्हारे जो रोएँ हैं, वे दाता के लिए आमिक्षा, दूध, घी और मधु दुहें।
Your hide, Śataudanā, and your hairs, inviolable one: let them yield to the giver curds, milk, ghee and honey.
- २५
क्रोडौ ते स्तां पुरोदाशाव् आज्येनाभिघारितौ ।तौ पक्षौ देवि कृत्वा सा पक्तारं दिवं वह
तुम्हारे छाती के दोनों भाग घी से सींचे हुए दो पुरोडाश बनें। हे देवी, उन्हें पंख बनाकर तुम पकाने वाले को स्वर्ग ले जाओ।
Let the two halves of your breast be two purodasha cakes basted with ghee. Making them your wings, goddess, carry the one who cooks you to heaven.
- २६
उलूखले मुसले यश् च चर्मणि यो वा शूर्पे तण्डुलः कणः ।यं वा वातो मातरिश्वा पवमानो ममाथाग्निष् टद् धोता सुहुतं कृणोतु
ओखली में, मूसल में, खाल पर या सूप में जो चावल का दाना या कण रह गया है, या जिसे पवित्र करने वाले वायु मातरिश्वा ने उड़ा दिया है, उसे होता अग्नि भली प्रकार आहुति बना दे।
Whatever grain of rice or fragment is in the mortar, on the pestle, on the hide or in the winnowing basket, or whatever the purifying wind Matarishvan has blown away: may Agni the hotar make it well offered.
- २७
अपो देवीर् मधुमतीर् घृतश्चुतो ब्रह्मणां हस्तेषु प्रपृथक् सादयामि ।यत्काम इदम् अभिषिञ्चामि वो ऽहं तन् मे सर्वं सं पद्यतां वयं स्याम पतयो रयीणाम् ॥२७॥ {३२}
मधुर, घी टपकाने वाले दिव्य जलों को मैं ब्राह्मणों के हाथों में अलग-अलग रखता हूँ। जिस कामना से मैं तुम (ब्राह्मणों) पर यह सींचता हूँ, वह सब मुझे मिले; हम धन के स्वामी हों।
I place the divine waters, honeyed and dripping ghee, separately in the hands of the brahmins. Whatever I wish for as I pour this upon you (brahmins), may all of it come to me; may we be masters of riches.