ऋग्वेदRigvedaRV 1.165
मरुत्वानिन्द्रः
नीचे के भावार्थ AI से बने हैं और समीक्षा बाकी है।The meanings below are AI-generated and await review.
- १
कया॑ शु॒भा सव॑यसः॒ सनी॑ळाः समा॒न्या म॒रुतः॒ सं मि॑मिक्षुः ।कया॑ म॒ती कुत॒ एता॑स ए॒तेऽर्च॑न्ति॒ शुष्मं॒ वृष॑णो वसू॒या
किस शोभा से समान आयु वाले, एक ही घर (कुल) के मरुत् एक साथ जुड़कर आए हैं? किस विचार से और कहाँ से ये आए हैं? ये वृषभ-समान वीर धन की कामना से (अपने) बल का गान करते हैं।
With what shared splendour have the Maruts, all of one age and one nest, joined together? With what thought, and from where, have they come? Do these bulls sing their own fierce strength out of desire for wealth?
- २
कस्य॒ ब्रह्मा॑णि जुजुषु॒र्युवा॑नः॒ को अ॑ध्व॒रे म॒रुत॒ आ व॑वर्त ।श्ये॒नाँ इ॑व॒ ध्रज॑तो अ॒न्तरि॑क्षे॒ केन॑ म॒हा मन॑सा रीरमाम
इन युवा मरुतों ने किसकी स्तुतियों का आदर किया? इन्हें किसने अपने यज्ञ की ओर मोड़ा? अन्तरिक्ष में उड़ते बाजों-जैसे इन (मरुतों) को हम किस महान् मन से रोककर प्रसन्न करें?
Whose sacred formulations have the young ones enjoyed? Who has turned the Maruts toward his rite? With what great thought might we make them stop as they speed like falcons through the midspace?
- ३
कुत॒स्त्वमि॑न्द्र॒ माहि॑नः॒ सन्नेको॑ यासि सत्पते॒ किं त॑ इ॒त्था ।सं पृ॑च्छसे समरा॒णः शु॑भा॒नैर्वो॒चेस्तन्नो॑ हरिवो॒ यत्ते॑ अ॒स्मे
हे इन्द्र! महान् होते हुए भी तुम कहाँ से अकेले आ रहे हो, हे सत्पते? तुम्हारा ऐसा क्या प्रयोजन है? शोभायमान हम से मिलकर तुम पूछ-ताछ करते हो; हे हरिवान्! जो तुम्हारे मन में हमारे प्रति है, वह हमें बताओ।
(The Maruts:) From where do you come alone, Indra, great as you are, lord of the settled people? Why are you like this? You question us as you meet us, the shining ones. Tell us, master of the fallow bay horses, what you have to do with us.
- ४
ब्रह्मा॑णि मे म॒तयः॒ शं सु॒तासः॒ शुष्म॑ इयर्ति॒ प्रभृ॑तो मे॒ अद्रिः॑ ।आ शा॑सते॒ प्रति॑ हर्यन्त्यु॒क्थेमा हरी॑ वहत॒स्ता नो॒ अच्छ॑
मेरे लिए स्तोत्र, स्तुतियाँ और निचोड़े हुए सोम सुखकर हैं; मेरा बल उमड़ता है, मेरे लिए (सोम कूटने का) पत्थर उठाया गया है। स्तोत्र मुझे पुकारते और प्रसन्नता से बुलाते हैं; ये दोनों हरि (घोड़े) हमें उनकी ओर ले चलते हैं।
(Indra:) The sacred formulations are mine, and so are the inspired thoughts; the pressed soma-drinks bring me good fortune. My fierce strength surges, and my stone is brought forward. They call on me and long for the hymns. These two fallow bays carry me to them.
- ५
अतो॑ व॒यम॑न्त॒मेभि॑र्युजा॒नाः स्वक्ष॑त्रेभिस्त॒न्व१ः॒॑ शुम्भ॑मानाः ।महो॑भि॒रेताँ॒ उप॑ युज्महे॒ न्विन्द्र॑ स्व॒धामनु॒ हि नो॑ ब॒भूथ॑
इसीलिए हम अपने निकट साथियों से जुड़े, अपने ही बल से शरीरों को सजाते हुए, अपनी महिमाओं सहित इन (वाहनों) को अभी जोतते हैं। हे इन्द्र! तुम सदा हमारी स्वधा (स्वतन्त्र शक्ति) के अनुकूल रहे हो।
(The Maruts:) So we have yoked ourselves with our nearest horses, adorning our bodies with our own powers. With our might we now harness these mares, for, Indra, you have come over to our way.
- ६
क्व१॒॑ स्या वो॑ मरुतः स्व॒धासी॒द्यन्मामेकं॑ स॒मध॑त्ताहि॒हत्ये॑ ।अ॒हं ह्यु१॒॑ग्रस्त॑वि॒षस्तुवि॑ष्मा॒न्विश्व॑स्य॒ शत्रो॒रन॑मं वध॒स्नैः
हे मरुतो! तुम्हारी वह स्वधा कहाँ थी, जब तुमने अहि (वृत्र) के वध में मुझे अकेला छोड़ दिया? क्योंकि मैंने ही उग्र, बलवान् और सामर्थ्यवान् होकर अपने घातक अस्त्रों से हर शत्रु को झुका दिया।
(Indra:) Where was that independent will of yours, Maruts, when you left me alone to slay the serpent? For I am the strong one, mighty and powerful; with deadly weapons I bent down every enemy.
- ७
भूरि॑ चकर्थ॒ युज्ये॑भिर॒स्मे स॑मा॒नेभि॑र्वृषभ॒ पौंस्ये॑भिः ।भूरी॑णि॒ हि कृ॒णवा॑मा शवि॒ष्ठेन्द्र॒ क्रत्वा॑ मरुतो॒ यद्वशा॑म
हे वृषभ! तुमने हम सहयोगियों के साथ, समान पौरुष-कर्मों से बहुत कुछ किया है। हे शविष्ठ इन्द्र, हे मरुतो! हम संकल्प से बहुत कुछ करेंगे, जो भी हम चाहें।
(The Maruts:) You have done much with us as your yoke-mates, bull, with manly powers equal to yours. And we will do many things, mightiest Indra, by our resolve, we Maruts, whenever we wish.
- ८
वधीं॑ वृ॒त्रं म॑रुत इन्द्रि॒येण॒ स्वेन॒ भामे॑न तवि॒षो ब॑भू॒वान् ।अ॒हमे॒ता मन॑वे वि॒श्वश्च॑न्द्राः सु॒गा अ॒पश्च॑कर॒ वज्र॑बाहुः
हे मरुतो! अपने ही क्रोध से बलवान् होकर, अपनी इन्द्र-शक्ति से मैंने वृत्र को मारा। वज्रधारी मैंने ही इन सर्वदीप्त जलों को मनु के लिए सुगम (बहने योग्य) बनाया।
(Indra:) I slew Vritra, Maruts, with my own Indra-power, grown mighty by my own fury. I, mace in hand, made these all-glittering waters easy to travel for Manu.
- ९
अनु॑त्त॒मा ते॑ मघव॒न्नकि॒र्नु न त्वावाँ॑ अस्ति दे॒वता॒ विदा॑नः ।न जाय॑मानो॒ नश॑ते॒ न जा॒तो यानि॑ करि॒ष्या कृ॑णु॒हि प्र॑वृद्ध
हे मघवन्! तुम्हारा कोई कर्म रोका नहीं जा सकता; देवताओं में तुम्हारे समान कोई ज्ञात नहीं। न जो जन्म ले रहा है और न जो जन्म ले चुका है, तुम तक पहुँच पाता है। हे प्रवृद्ध! जो करना है, वह करो।
(The Maruts:) There is nothing you cannot move, bounteous one; no god is as knowing as you. No one being born and no one already born can reach the deeds you will do. Grown strong, do them.
- १०
एक॑स्य चिन्मे वि॒भ्व१॒॑स्त्वोजो॒ या नु द॑धृ॒ष्वान्कृ॒णवै॑ मनी॒षा ।अ॒हं ह्यु१॒॑ग्रो म॑रुतो॒ विदा॑नो॒ यानि॒ च्यव॒मिन्द्र॒ इदी॑श एषाम्
अकेले मेरा ही ओज विशाल है; जो कुछ मैं साहस करके करना चाहूँ, वह अपनी बुद्धि से कर लूँ। हे मरुतो! मैं उग्र और प्रसिद्ध हूँ; जिन कामों को मैं चलाता हूँ, उनका स्वामी इन्द्र ही है।
(Indra:) Let wide-reaching power belong to me alone; whatever I dare to do with my thought, I will do. For I am known as the strong one, Maruts; I, Indra, am master of whatever I set in motion.
- ११
अम॑न्दन्मा मरुतः॒ स्तोमो॒ अत्र॒ यन्मे॑ नरः॒ श्रुत्यं॒ ब्रह्म॑ च॒क्र ।इन्द्रा॑य॒ वृष्णे॒ सुम॑खाय॒ मह्यं॒ सख्ये॒ सखा॑यस्त॒न्वे॑ त॒नूभिः॑
हे मरुतो! यहाँ इस स्तोम ने मुझे आनन्दित किया — हे नरो! जो सुनने योग्य स्तुति तुमने मेरे लिए रची। वृषभ, उदार इन्द्र के लिए, मुझ सखा के लिए, तुम सखाओं ने अपने शरीरों से मेरे शरीर के लिए (यह स्तुति की)।
The praise song pleased me here, Maruts, the sacred formulation worth hearing that you heroes made for me: for Indra the bull, the generous one, for me, as friends for a friend, by yourselves for myself.
- १२
ए॒वेदे॒ते प्रति॑ मा॒ रोच॑माना॒ अने॑द्यः॒ श्रव॒ एषो॒ दधा॑नाः ।सं॒चक्ष्या॑ मरुतश्च॒न्द्रव॑र्णा॒ अच्छा॑न्त मे छ॒दया॑था च नू॒नम्
इस प्रकार ये मरुत् मेरे सामने चमकते हुए निर्दोष कीर्ति और बल धारण करते हैं। हे चन्द्र-वर्ण मरुतो! दिखाई देने पर तुमने मुझे प्रसन्न किया और अब भी प्रसन्न करते रहोगे।
Just so these Maruts, shining toward me and taking on blameless fame and refreshment, gleaming in colour and splendid to see, have pleased me, and they will please me now as well.
- १३
को न्वत्र॑ मरुतो मामहे वः॒ प्र या॑तन॒ सखीँ॒रच्छा॑ सखायः ।मन्मा॑नि चित्रा अपिवा॒तय॑न्त ए॒षां भू॑त॒ नवे॑दा म ऋ॒ताना॑म्
हे मरुतो! यहाँ तुम्हारी महिमा किसने बढ़ाई? हे सखाओ! अपने सखाओं की ओर चलो। हे अद्भुत मरुतो! हमारे मनन-वचनों को प्रेरित करते हुए मेरे इन ऋत-कर्मों के जानकार बनो।
Who here has exalted you, Maruts? Go forth, friends, toward your friends. Bright ones, quickening thoughts, be attentive to these truths of mine.
- १४
आ यद्दु॑व॒स्याद्दु॒वसे॒ न का॒रुर॒स्माञ्च॒क्रे मा॒न्यस्य॑ मे॒धा ।ओ षु व॑र्त्त मरुतो॒ विप्र॒मच्छे॒मा ब्रह्मा॑णि जरि॒ता वो॑ अर्चत्
जैसे कारु (स्तोता) सेवा के लिए सेवा करता है, वैसे ही मान-पुत्र की मेधा ने हमें (तुम्हारी ओर) लगाया है। हे मरुतो! इस विप्र की ओर भलीभाँति लौट आओ; यह स्तोता तुम्हारे लिए इन स्तुतियों का गान करे।
(The poet:) Since the skill of Manya has brought us here, as a bard would serve one worthy of service, turn here, Maruts, toward the inspired poet. The singer has chanted these sacred formulations to you.
- १५
ए॒ष वः॒ स्तोमो॑ मरुत इ॒यं गीर्मा॑न्दा॒र्यस्य॑ मा॒न्यस्य॑ का॒रोः ।एषा या॑सीष्ट त॒न्वे॑ व॒यां वि॒द्यामे॒षं वृ॒जनं॑ जी॒रदा॑नुम्
हे मरुतो! यह तुम्हारा स्तोम है, यह गीत मान्दार्य मान्य कारु का है। यह (स्तुति) हमारे शरीर के लिए पुष्टि लेकर आए। हम अन्न, बल और शीघ्र फल देने वाली सम्पदा प्राप्त करें।
This praise song is for you, Maruts, this hymn of the bard Manya, son of Mandara. Come here with refreshment and vigour for our bodies. May we find refreshment, a secure community, and lively drops.