अथर्ववेदAtharvavedaAV 5.19

ब्राह्मण-हिंसक को शापCurse on the injurer of Brahmins

नीचे के भावार्थ AI से बने हैं और समीक्षा बाकी है।The meanings below are AI-generated and await review.

  1. १

    अतिमात्रम् अवर्धन्त नोद् इव दिवम् अस्पृशन् ।भ्ŕ̥गुं हिंसित्वा स्ŕ̥ञ्जया वैतहव्याः पराभवन्

    वे हद से अधिक बढ़ गए, मानो आकाश को छूने ही वाले थे; पर भृगु की हिंसा करके वैतहव्य सृञ्जय नष्ट हो गए।

    They grew beyond all measure and almost touched the sky; but after harming Bhrigu, the Srinjayas, the Vaitahavyas, perished.

  2. २

    ये बृहत्सामानम् आङ्गिरसम् आर्पयन् ब्राह्मणं जनाः ।पेत्वस् तेषाम् उभयादम् अविस् तोकान्य् आवयत्

    जिन लोगों ने आङ्गिरस ब्राह्मण बृहत्सामन् को सताया, उनकी सन्तानों को दोनों जबड़ों में दाँत वाला मेढ़ा, भेड़ बनकर, खा गया।

    The people who assailed Brihatsaman, the Angirasa brahmin: a ram with teeth in both jaws, a sheep, devoured their offspring.

  3. ३

    ये ब्राह्मणं प्रत्यष्ठीवन् ये वास्मिञ् छुल्कम् ईषिरे ।अस्नस् ते मध्ये कुल्यायाः केशान् खादन्त आसते

    जिन्होंने ब्राह्मण पर थूका, या जिन्होंने उससे शुल्क माँगा, वे रक्त की धारा के बीच बैठे बाल चबाते रहते हैं।

    Those who spat at a brahmin, or who demanded a payment from him, sit in the middle of a stream of blood, chewing hair.

  4. ४

    ब्रह्मगवी पच्यमाना यावत् साभि विजङ्गहे ।तेजो राष्ट्रस्य निर् हन्ति न वीरो जायते व्ŕ̥षा

    ब्राह्मण की गाय जब पकाई जाती है और जब तक वह छटपटाती है, तब तक वह राष्ट्र का तेज नष्ट करती है; वहाँ कोई बलवान वीर पैदा नहीं होता।

    As long as the Brahmin's cow, being cooked, writhes, she destroys the splendour of the kingdom; no virile hero is born there.

  5. ५

    क्रूरम् अस्या आशसनं तृष्टं पिशितम् अस्यते ।क्षीरं यद् अस्याः पीयते तद् वै पित्ŕ̥षु किल्बिषम्

    उसका वध क्रूर होता है, उसका माँस कड़वा मानकर फेंक दिया जाता है; उसका जो दूध पिया जाता है, वह पितरों के बीच पाप माना जाता है।

    Her slaughter is cruel; her flesh is thrown away as bitter; the milk of hers that is drunk counts as a sin among the Fathers.

  6. ६

    उग्रो राजा मन्यमानो ब्राह्मणं यो जिघत्सति ।परा तत् सिच्यते राष्ट्रं ब्राह्मणो यत्र जीयते

    जो राजा स्वयं को शक्तिशाली मानकर ब्राह्मण को निगलना चाहता है, जहाँ ब्राह्मण को सताया जाता है, वह राष्ट्र पानी की तरह बह जाता है।

    The king who thinks himself mighty and seeks to devour a brahmin: where a brahmin is oppressed, that kingdom drains away.

  7. ७

    अष्टापदी चतुरक्षी चतुःश्रोत्रा चतुर्हनुः ।द्व्या᳙स्या द्विजिह्वा भूत्वा सा राष्ट्रम् अव धूनुते ब्रह्मज्यस्य

    वह (ब्राह्मण की गाय) आठ पैरों, चार आँखों, चार कानों, चार जबड़ों, दो मुखों और दो जिह्वाओं वाली बनकर ब्रह्मज्य के राष्ट्र को झकझोरकर गिरा देती है।

    Becoming eight-footed, four-eyed, four-eared, four-jawed, two-mouthed and two-tongued, she shakes down the kingdom of the one who harms brahmins.

  8. ८

    तद् वै राष्ट्रम् आ स्रवति नावं भिन्नाम् इवोदकम् ।ब्रह्माणं यत्र हिंसन्ति तद् राष्ट्रं हन्ति दुछुना

    जैसे टूटी नाव में पानी भरता है, वैसे ही उस राष्ट्र में (विपत्ति) रिसती है; जहाँ ब्राह्मण की हिंसा होती है, उस राष्ट्र को दुर्भाग्य मार डालता है।

    Ruin seeps into that kingdom as water into a broken boat; where they harm a brahmin, misfortune strikes that kingdom down.

  9. ९

    तं वृक्षा अप सेधन्ति छायां नो मोप गा इति ।यो ब्राह्मणस्य सद् धनम् अभि नारद मन्यते

    हे नारद, जो ब्राह्मण के धन पर नज़र रखता है, उसे वृक्ष यह कहकर भगा देते हैं: 'हमारी छाया में मत आना।'

    The trees drive him away, saying, 'Do not come into our shade' — the man, O Narada, who covets a brahmin's wealth.

  10. १०

    विषम् एतद् देवकृतं राजा वरुणो ऽब्रवीत् ।न ब्राह्मणस्य गां जग्ध्वा रास्त्रे जागार कश् चन

    राजा वरुण ने कहा: यह देवताओं का बनाया विष है; ब्राह्मण की गाय खाकर कोई भी राष्ट्र में जागता नहीं रहा।

    King Varuna said: this is a poison made by the gods; no one who has eaten a brahmin's cow has stayed awake in the kingdom.

  11. ११

    नवैव ता नवतयो या भूमिर् व्य᳙धूनुत ।प्रजां हिंसित्वा ब्राह्मणीम् असंभव्यं पराभवन्

    वे नौ नब्बे (लोग), जिन्हें भूमि ने झटककर गिरा दिया, ब्राह्मण की सन्तान की हिंसा करके ऐसे नष्ट हुए कि फिर कभी नहीं उठे।

    Those nine nineties whom the earth shook off perished beyond recovery for harming the offspring of a brahmin.

  12. १२

    याम् मृतायानुबध्नन्ति कूद्यं᳙ पदयोपनीम् ।तद् वै ब्रह्मज्य ते देवा उपस्तरणम् अब्रुवन्

    हे ब्रह्मज्य, पैरों के निशान मिटाने वाला जो 'कूदी' (टहनियों का गुच्छा) मृतक के साथ बाँधा जाता है, देवताओं ने उसी को तेरा बिछौना बताया।

    The kūdī (a bundle of twigs) they tie to the dead, which wipes out the footprints — that, O harmer of brahmins, the gods named as your bedding.

  13. १३

    अश्रूणि क्ŕ̥पमानस्य यानि जीतस्य वावृतुः ।तं वै ब्रह्मज्य ते देवा अपां भागम् अधारयन्

    हे ब्रह्मज्य, सताए गए और विलाप करते हुए (ब्राह्मण) के जो आँसू बहे, देवताओं ने उन्हीं को तेरे हिस्से का जल ठहराया।

    The tears that flowed from the wronged man as he lamented — those, O harmer of brahmins, the gods assigned to you as your share of water.

  14. १४

    येन मृतं स्नपयन्ति श्मश्रूणि येनोन्दते ।तं वै ब्रह्मज्य ते देवा अपां भागम् अधारयन्

    हे ब्रह्मज्य, जिस जल से मृतक को नहलाते हैं और जिससे उसकी दाढ़ी भिगोते हैं, देवताओं ने उसी को तेरे हिस्से का जल ठहराया।

    The water with which they bathe the dead and wet the beard — that, O harmer of brahmins, the gods assigned to you as your share of water.

  15. १५

    न वर्षं मैत्रावरुणं ब्रह्मज्यम् अभि वर्षति ।नास्मै समितिः कल्पते न मित्रं नयते वशम्

    मित्र और वरुण की वर्षा ब्रह्मज्य पर नहीं बरसती; सभा (समिति) उसके अनुकूल नहीं होती, और वह किसी मित्र को अपने वश में नहीं कर पाता।

    The rain of Mitra and Varuna does not fall on the harmer of brahmins; the assembly does not side with him, and he wins no friend to his will.