अथर्ववेदAtharvavedaAV 9.7

गो का विश्वरूपThe ox as the universe

नीचे के भावार्थ AI से बने हैं और समीक्षा बाकी है।The meanings below are AI-generated and await review.

  1. १

    प्रजापतिश् च परमेष्ठी च श्ŕ̥ङ्गे इन्द्रः शिरो अग्निर् ललाटं यमः क्ŕ̥काटम्

    प्रजापति और परमेष्ठी (इस गो के) दो सींग हैं, इन्द्र सिर है, अग्नि माथा है और यम गर्दन का जोड़ है।

    Prajapati and Parameshthin are its two horns, Indra its head, Agni its forehead, Yama the joint of its neck.

  2. २

    सोमो राजा मस्तिष्को द्यौर् उत्तरहनुः पृथिव्य् अ᳙धरहनुः

    राजा सोम मस्तिष्क है, द्यौ ऊपर का जबड़ा है, पृथिवी नीचे का जबड़ा है।

    King Soma is its brain, Dyaus its upper jaw, Prithivi its lower jaw.

  3. ३

    विद्युज् जिह्वा मरुतो दन्ता रेवतिर् ग्रीवाः क्ŕ̥त्तिका स्कन्धा घर्मो वहः

    बिजली जीभ है, मरुत् दाँत हैं, रेवती (नक्षत्र) गर्दन है, कृत्तिकाएँ कंधे हैं, घर्म जुए वाला भाग (वह) है।

    Lightning is its tongue, the Maruts its teeth, the Revatis its neck, the Krittikas its shoulders, the gharma its yoke-bearing hump.

  4. ४

    विश्वं वायुः स्वर्गो लोकः कृष्णद्रं विधरणी निवेष्यः

    इसका समस्त (शरीर) वायु है, स्वर्ग लोक इसका कृष्णद्र है, विधरणी इसका निवेष्य है।

    Its whole is Vayu; the heavenly world is its kṛṣṇadra; the vidharaṇī is its niveṣya.

  5. ५

    श्येनः क्रोतो ऽन्तरिक्षं पाजस्यं᳙ ब्ŕ̥हस्पतिः ककुद् बृहतीः कीकसाः

    श्येन (बाज़) इसकी छाती है, अन्तरिक्ष इसका पाजस्य (पार्श्व) है, बृहस्पति कूबड़ है, बृहती (छन्द) इसकी छाती की हड्डियाँ (कीकस) हैं।

    The falcon is its breast, the atmosphere its flank, Brihaspati its hump, the Brihati metres its breastbone vertebrae.

  6. ६

    देवानां पत्नीः पृष्टय उपसदः पर्शवः

    देवों की पत्नियाँ इसकी पसलियाँ हैं, उपसद् (यज्ञ-कर्म) इसकी पार्श्व-अस्थियाँ हैं।

    The wives of the gods are its ribs, the Upasad rites its side-bones.

  7. ७

    मित्रश् च वरुणश् चांसौ त्वष्टा चार्यमा च दोषणी महादेवो बाहू

    मित्र और वरुण कंधे हैं, त्वष्टा और अर्यमा अगली टाँगों के ऊपरी भाग हैं, महादेव भुजाएँ (अगले पैर) हैं।

    Mitra and Varuna are its shoulders, Tvashtar and Aryaman its forelegs, Mahadeva its arms.

  8. ८

    इन्द्राणी भसद् वायुः पुछं पवमानो बालाः

    इन्द्राणी इसका पिछला भाग है, वायु पूँछ है, पवमान (सोम) पूँछ के बाल हैं।

    Indrani is its hindquarters, Vayu its tail, Pavamana the hairs of its tail.

  9. ९

    ब्रह्म च क्षत्रं च श्रोणी बलम् ऊरू

    ब्रह्म और क्षत्र इसके दो कूल्हे हैं, बल इसकी जाँघें हैं।

    Brahman and kshatra are its two hips, strength its thighs.

  10. १०

    धाता च सविता चाष्ठीवन्तौ जङ्घा गन्धर्वा अप्सरसः कुष्ठिका अदितिः शफाः

    धाता और सविता घुटने हैं, गन्धर्व पिंडलियाँ हैं, अप्सराएँ कुष्ठिका हैं, अदिति खुर हैं।

    Dhatar and Savitar are its knees, the Gandharvas its shanks, the Apsarases its kuṣṭhikās, Aditi its hooves.

  11. ११

    चेतो ह्ŕ̥दयं यकृन् मेधा व्रतं पुरीतत्

    चेतना हृदय है, मेधा यकृत् है, व्रत पुरीतत् (हृदय की झिल्ली) है।

    Thought is its heart, wisdom its liver, the vow its pericardium.

  12. १२

    क्षुत् कुक्षिर् इरा वनिष्ठुः पर्वताः प्लाशयः

    भूख इसकी कोख (पेट) है, इरा (अन्न-रस) वनिष्ठु है, पर्वत इसकी आँतें हैं।

    Hunger is its belly, nourishment its vaniṣṭhu, the mountains its entrails.

  13. १३

    क्रोधो वृक्कौ मन्युर् आण्डौ प्रजा शेपः

    क्रोध इसके गुर्दे हैं, मन्यु (रोष) इसके अण्डकोष हैं, प्रजा इसका लिंग है।

    Anger is its kidneys, wrath its testicles, offspring its penis.

  14. १४

    नदी सूत्री वर्षस्य पतय स्तना स्तनयित्नुर् ऊधः

    नदी सूत्री है, वर्षा के स्वामी थन हैं, गरजता मेघ ऐन (थनों का कोश) है।

    The river is its sūtrī, the lords of rain its teats, the thunder its udder.

  15. १५

    विश्वव्यचास् चर्मौषधयो लोमानि नक्षत्राणि रूपम्

    सर्वव्यापी (विश्वव्यचा) इसकी खाल है, औषधियाँ रोम हैं, नक्षत्र इसका रूप (रंग) हैं।

    The all-embracing one is its skin, the plants its hairs, the stars its colouring.

  16. १६

    देवजना गुदा मनुष्या᳙ आन्त्राण्य् अत्रा उदरम्

    देवजन इसकी गुदा हैं, मनुष्य आँतें हैं, भक्षक (अत्र) पेट हैं।

    The god-folk are its rectum, humans its intestines, the devourers its belly.

  17. १७

    रक्षांसि लोहितम् इतरजना ऊबध्यम्

    राक्षस इसका रक्त हैं, अन्य जन (इतरजन) पेट का अपचा अन्न हैं।

    The rakshases are its blood, the other folk its undigested stomach contents.

  18. १८

    अभ्रं पीबो मज्जा निधनम्

    बादल इसकी चर्बी है, निधन (विश्राम-स्थान) इसकी मज्जा है।

    The cloud is its fat, the resting-place its marrow.

  19. १९

    अग्निर् आसीन उत्थितो ऽश्विना

    बैठा हुआ यह अग्नि है, उठा हुआ यह अश्विन् हैं।

    Sitting, it is Agni; risen, it is the Ashvins.

  20. २०

    इन्द्रः प्राङ् तिष्ठन् दक्षिणा तिष्ठन् यमः

    पूर्व की ओर खड़ा यह इन्द्र है, दक्षिण की ओर खड़ा यह यम है।

    Standing toward the east, it is Indra; standing toward the south, it is Yama.

  21. २१

    प्रत्यङ् तिष्ठन् धातोदङ् तिष्ठन्त् सविता

    पश्चिम की ओर खड़ा यह धाता है, उत्तर की ओर खड़ा यह सविता है।

    Standing toward the west, it is Dhatar; standing toward the north, it is Savitar.

  22. २२

    त्ŕ̥णानि प्राप्तः सोमो राजा

    घास तक पहुँचा हुआ यह राजा सोम है।

    Having reached the grass, it is King Soma.

  23. २३

    मित्र ईक्षमाण आवृत्त आनन्दः

    देखता हुआ यह मित्र है, लौटकर आया हुआ यह आनन्द है।

    Looking about, it is Mitra; turned back home, it is joy.

  24. २४

    युज्यमानो वैश्वदेवो युक्तः प्रजापतिर् विमुक्तः सर्वम्

    जोता जाता हुआ यह विश्वेदेवों का है, जुता हुआ प्रजापति है, खोला हुआ सब कुछ है।

    While being yoked, it belongs to all the gods; yoked, it is Prajapati; unyoked, it is everything.

  25. २५

    एतद् वै विश्वरूपं सर्वरूपं गोरूपम्

    यही विश्वरूप है, सर्वरूप है, गो-रूप है।

    This indeed is the form of all, of every form, the form of the cow.

  26. २६

    उपैनं विश्वरूपाः सर्वरूपाः पशवस् तिष्ठन्ति य एवं वेद ॥२६॥ {२१}

    जो ऐसा जानता है, उसके पास सब रूपों वाले, हर रूप के पशु आ खड़े होते हैं।

    Animals of every form, of all forms, come and stand by the one who knows this.