अथर्ववेदAtharvavedaAV 9.8

शरीर से रोग का निष्कासनCharming disease out of the body

नीचे के भावार्थ AI से बने हैं और समीक्षा बाकी है।The meanings below are AI-generated and await review.

  1. १

    शीर्षक्तिं शीर्षामयं कर्णशूलं विलोहितम् ।सर्वं शीर्षन्यं᳙ ते रोगं बहिर् निर् मन्त्रयामहे

    सिर की पीड़ा, सिर का रोग, कान का दर्द और विलोहित — तेरे सिर के सारे रोग को हम मन्त्र से बाहर निकालते हैं।

    Headache, head-disease, earache, and vilohita: all the disease of your head we charm out and away.

  2. २

    कर्णाभ्यां ते कङ्कूषेभ्यः कर्णशूलं विसल्पकम् ।सर्वं शीर्षन्यं᳙ ते रोगं बहिर् निर् मन्त्रयामहे

    तेरे दोनों कानों से, कङ्कूषों से कान का दर्द और विसल्पक — तेरे सिर के सारे रोग को हम मन्त्र से बाहर निकालते हैं।

    From your ears and your kankusha, the earache and the visalpaka: all the disease of your head we charm out and away.

  3. ३

    यस्य हेतोः प्रच्यवते यक्ष्मः कर्णतो आस्यतः ।सर्वं शीर्षन्यं᳙ ते रोगं बहिर् निर् मन्त्रयामहे

    जिसके कारण यक्ष्म कान से और मुँह से बाहर बहता है — तेरे सिर के सारे रोग को हम मन्त्र से बाहर निकालते हैं।

    That which makes the yakshma flow out of the ear and the mouth: all the disease of your head we charm out and away.

  4. ४

    यः कृणोति प्रमोतम् अन्धं कृणोति पूरुषम् ।सर्वं शीर्षन्यं᳙ ते रोगं बहिर् निर् मन्त्रयामहे

    जो मनुष्य को गूँगा और अन्धा कर देता है — तेरे सिर के सारे रोग को हम मन्त्र से बाहर निकालते हैं।

    That which makes a man dumb and makes him blind: all the disease of your head we charm out and away.

  5. ५

    अङ्गभेदम् अङ्गज्वरम् विश्वाङ्ग्यं᳙ विसल्पकम् ।सर्वं शीर्षन्यं᳙ ते रोगं बहिर् निर् मन्त्रयामहे

    अंगों का टूटना, अंगों का ज्वर, सारे अंगों में फैला विसल्पक — तेरे सिर के सारे रोग को हम मन्त्र से बाहर निकालते हैं।

    Limb-breaking pain, fever of the limbs, the visalpaka that spreads through every limb: all the disease of your head we charm out and away.

  6. ६

    यस्य भीमः प्रतीकाश उद्वेपयति पूरुषम् ।तक्मानं विश्वशारदं बहिर् निर् मन्त्रयामहे

    जिसका भयानक रूप मनुष्य को काँपा देता है, उस हर शरद् में लौटने वाले तक्मन् को हम मन्त्र से बाहर निकालते हैं।

    Takman, whose terrible look sets a man shaking, the fever that comes back every autumn, we charm out and away.

  7. ७

    य ऊरू अनुसर्पत्य् अथो एति गवीनिके ।यक्ष्मं ते अन्तर् अङ्गेभ्यो बहिर् निर् मन्त्रयामहे

    जो जाँघों में रेंगता है और फिर गवीनिकाओं तक जाता है, उस यक्ष्म को तेरे अंगों के भीतर से हम मन्त्र से बाहर निकालते हैं।

    The yakshma that creeps along the thighs and then reaches the gavinika ducts, we charm out from within your limbs.

  8. ८

    यदि कामाद् अपकामाद् ध्ŕ̥दयाज् जायते परि ।हृदो बलासम् अङ्गेभ्यो बहिर् निर् मन्त्रयामहे

    चाहे वह काम से, अपकाम से या हृदय से पैदा हुआ हो, उस बलास को हृदय और अंगों से हम मन्त्र से बाहर निकालते हैं।

    Whether it arises from desire, from aversion, or from the heart, we charm the balasa out of the heart and the limbs.

  9. ९

    हरिमाणं ते अङ्गेभ्यो ऽप्वाम् अन्तरोदरात् ।यक्ष्मोधाम् अन्तर् आत्मनो बहिर् निर् मन्त्रयामहे

    तेरे अंगों से पीलिया को, पेट के भीतर से अप्वा को, और आत्मा के भीतर से यक्ष्मोधा को हम मन्त्र से बाहर निकालते हैं।

    Jaundice from your limbs, the apva from inside your belly, the yakshmodha from within your body, we charm out and away.

  10. १०

    आसो बलासो भवतु मूत्रं भवत्व् आमयत् ।यक्ष्माणां सर्वेषां विषं निर् अवोचम् अहं त्वत् ॥१०॥ {२२}

    बलास राख बन जाए, रोगी अंश मूत्र बन जाए। सब यक्ष्मों का विष मैंने तुझसे मन्त्र द्वारा निकाल दिया है।

    Let the balasa turn to ash, let the diseased matter turn to urine. I have charmed out of you the poison of all the yakshmas.

  11. ११

    बहिर् बिलं निर् द्रवतु काहाबाहं तवोदरात् ।यक्ष्माणां सर्वेषां विषं निर् अवोचम् अहं त्वत्

    काहाबाह तेरे पेट से छेद के रास्ते बाहर बह जाए। सब यक्ष्मों का विष मैंने तुझसे मन्त्र द्वारा निकाल दिया है।

    Let the kahabaha run out of your belly, out through the opening. I have charmed out of you the poison of all the yakshmas.

  12. १२

    उदरात् ते क्लोम्नो नाभ्या ह्ŕ̥दयाद् अधि ।यक्ष्माणां सर्वेषां विषं निर् अवोचम् अहं त्वत्

    तेरे पेट से, क्लोम से, नाभि से और हृदय से, सब यक्ष्मों का विष मैंने तुझसे मन्त्र द्वारा निकाल दिया है।

    From your belly, your lungs, your navel, and your heart, I have charmed out of you the poison of all the yakshmas.

  13. १३

    याः सीमानं विरुजन्ति मूर्धानं प्रत्य् अर्षनीः ।अहिंसन्तीर् अनामया निर् द्रवन्तु बहिर् बिलम्

    जो पीड़ाएँ खोपड़ी की सीवन को फाड़ती हैं और सिर की ओर चुभती जाती हैं, वे बिना हानि किए, बिना रोग छोड़े, छेद से बाहर बह जाएँ।

    The shooting pains that split the sutures of the skull and stab toward the crown: let them do no harm, leave no disease, and run out through the opening.

  14. १४

    या ह्ŕ̥दयम् उपर्षन्त्य् अनुतन्वन्ति कीकसाः ।अहिंसन्तीर् अनामया निर् द्रवन्तु बहिर् बिलम्

    जो हृदय तक चुभती जाती हैं और कीकसाओं में फैलती हैं, वे बिना हानि किए, बिना रोग छोड़े, छेद से बाहर बह जाएँ।

    Those that shoot to the heart and spread along the breastbone: let them do no harm, leave no disease, and run out through the opening.

  15. १५

    याः पार्श्वे उपर्षन्त्य् अनुनिक्षन्ति पृष्टीः ।अहिंसन्तीर् अनामया निर् द्रवन्तु बहिर् बिलम्

    जो पसलियों के पास तक चुभती हैं और पसलियों में छेदती जाती हैं, वे बिना हानि किए, बिना रोग छोड़े, छेद से बाहर बह जाएँ।

    Those that shoot to the sides and pierce along the ribs: let them do no harm, leave no disease, and run out through the opening.

  16. १६

    यास् तिरश्चीः उपर्षन्त्य् अर्षणीर् वक्षणासु ते ।अहिंसन्तीर् अनामया निर् द्रवन्तु बहिर् बिलम्

    जो तिरछी चुभती पीड़ाएँ तेरी वक्षणाओं में दौड़ती हैं, वे बिना हानि किए, बिना रोग छोड़े, छेद से बाहर बह जाएँ।

    The pains that dart crosswise into your groin: let them do no harm, leave no disease, and run out through the opening.

  17. १७

    या गुदा अनुसर्पन्त्य् आन्त्राणि मोहयन्ति च ।अहिंसन्तीर् अनामया निर् द्रवन्तु बहिर् बिलम्

    जो अंतड़ियों में रेंगती हैं और आँतों को बिगाड़ देती हैं, वे बिना हानि किए, बिना रोग छोड़े, छेद से बाहर बह जाएँ।

    Those that creep along the guts and throw the bowels into disorder: let them do no harm, leave no disease, and run out through the opening.

  18. १८

    या मज्ज्ञो निर्धयन्ति परूंषि विरुजन्ति च ।अहिंसन्तीर् अनामया निर् द्रवन्तु बहिर् बिलम्

    जो मज्जा को चूस लेती हैं और जोड़ों को तोड़ती हैं, वे बिना हानि किए, बिना रोग छोड़े, छेद से बाहर बह जाएँ।

    Those that suck out the marrow and break up the joints: let them do no harm, leave no disease, and run out through the opening.

  19. १९

    ये अङ्गानि मदयन्ति यक्ष्मासो रोपणास् तव ।यक्ष्माणां सर्वेषां विषं निर् अवोचम् अहं त्वत्

    तेरे जो पीड़ा देने वाले यक्ष्म अंगों को सुन्न कर देते हैं — सब यक्ष्मों का विष मैंने तुझसे मन्त्र द्वारा निकाल दिया है।

    The tormenting yakshmas that numb your limbs: I have charmed out of you the poison of all the yakshmas.

  20. २०

    विसल्पस्य विद्रधस्य वातीकारस्य वालजेः ।यक्ष्माणां सर्वेषां विषं निर् अवोचम् अहं त्वत्

    विसल्प, विद्रध, वातीकार और अलजि — सब यक्ष्मों का विष मैंने तुझसे मन्त्र द्वारा निकाल दिया है।

    Of visalpa, of abscess, of vatikara, of alaji: I have charmed out of you the poison of all the yakshmas.

  21. २१

    पादाभ्यां ते जानुभ्यां श्रोणिभ्यां परि भंससः ।अनूकाद् अर्षणीर् उष्णिहाभ्यः शीर्ष्णो रोगम् अनीनशम्

    तेरे पैरों से, घुटनों से, कूल्हों से, नितम्ब से, रीढ़ से और गर्दन की नसों से चुभती पीड़ाओं को और सिर के रोग को मैंने नष्ट कर दिया है।

    From your feet, your knees, your hips, and your buttocks, from your spine and the nape of your neck, I have destroyed the shooting pains and the disease of the head.

  22. २२

    सं ते शीर्ष्णः कपालानि ह्ŕ̥दयस्य च यो विधुः ।उद्यन्न् आदित्य रश्मिभिः शीर्ष्णो रोगम् अनीनशो ऽङ्गभेदम् अशीशमः ॥२२॥ {२३}

    तेरे सिर की खोपड़ी की हड्डियाँ और हृदय की धड़कन फिर ठीक हो गई हैं। हे आदित्य, तूने उगते हुए अपनी किरणों से सिर का रोग नष्ट किया और अंगों की पीड़ा शान्त की।

    The bones of your skull have joined again, and so has the throbbing of your heart. Rising with your rays, Aditya, you have destroyed the disease of the head and calmed the pain in the limbs.