अथर्ववेदAtharvavedaAV 4.10
शङ्ख-मणि से रक्षाProtection by the shell amulet
नीचे के भावार्थ AI से बने हैं और समीक्षा बाकी है।The meanings below are AI-generated and await review.
- १
वाताज् जातो अन्तरिक्षाद् विद्युतो ज्योतिषस् परि ।स नो हिरण्यजाः शङ्खः क्ŕ̥शनः पात्व् अंहसः
वायु से, अन्तरिक्ष से, विद्युत् से और ज्योति से जन्मा, स्वर्ण से उत्पन्न यह शङ्ख, यह मोती, हमें संकट से बचाए।
Born of the wind, of the midspace, of lightning and of light, may this gold-born shell, the pearl, protect us from distress.
- २
यो अग्रतो रोचनानां समुद्राद् अधि जज्ञिषे ।शङ्खेन हत्वा रक्षांस्य् अत्त्रिणो वि षहामहे
तुम जो दीप्तिमान लोकों के आगे, समुद्र से उत्पन्न हुए हो — उस शङ्ख से राक्षसों को मारकर हम भक्षक (अत्त्रिन्) शत्रुओं को पराजित करते हैं।
You who were born from the ocean, at the forefront of the lights: with the shell we slay the demons and overpower the devourers.
- ३
शङ्खेनामीवाम् अमतिं शङ्खेनोत सदान्वाः ।शङ्खो नो विश्वभेषजः क्ŕ̥शनः पात्व् अंहसः
शङ्ख से रोग और दुर्बुद्धि (या दरिद्रता) को, शङ्ख से सदान्वा राक्षसियों को भी हम जीतते हैं। सर्व-औषधि रूप शङ्ख, यह मोती, हमें संकट से बचाए।
With the shell we overcome disease and want, with the shell the Sadanva demonesses too. May the shell, our cure for all things, the pearl, protect us from distress.
- ४
दिवि जातः समुद्रजः सिन्धुतस् पर्य् आभृतः ।स नो हिरण्यजाः शङ्ख आयुष्प्रतरणो मणिः
आकाश में जन्मा, समुद्र से उत्पन्न, नदी से लाया गया — स्वर्ण से जन्मा यह शङ्ख हमारे लिए आयु बढ़ाने वाली मणि है।
Born in heaven, sprung from the ocean, brought here from the river, this gold-born shell is for us an amulet that lengthens life.
- ५
समुद्राज् जातो मणिर् वृत्राज् जातो दिवाकरः ।सो अस्मान्त् सर्वतः पातु हेत्या देवासुरेभ्यः
समुद्र से मणि जन्मी, वृत्र से सूर्य (दिवाकर) जन्मा; वह हमें चारों ओर से देवों और असुरों के अस्त्र से बचाए।
The amulet is born from the ocean, the sun is born from Vritra; may it guard us on every side from the weapon of gods and asuras.
- ६
हिरण्यानाम् एको ऽसि सोमात् त्वम् अधि जज्ञिषे ।रथे त्वम् असि दर्शत इषुधौ रोचनस् त्वं प्र ण आयूंषि तारिषत्
तुम स्वर्ण-वस्तुओं में से एक हो, तुम सोम से उत्पन्न हुए हो। रथ पर तुम दर्शनीय हो, तरकश पर तुम चमकते हो; वह हमारी आयु बढ़ाए।
You are one among things of gold; you were born from Soma. On the chariot you are handsome, on the quiver you shine; may it lengthen our lives.
- ७
देवानाम् अस्थि क्ŕ̥शनं बभूव तद् आत्मन्वच् चरत्य् अप्स्व् अ᳙न्तः ।तत् ते बध्नाम्य् आयुषे वर्चसे बलाय दीर्घायुत्वाय शतशारदाय कार्शनस् त्वाभि रक्षतु
देवों की अस्थि मोती बन गई; वह आत्मा से युक्त होकर जल के भीतर विचरती है। (अब पहनने वाले से:) उसे मैं तुम पर आयु, तेज, बल और सौ शरद् की दीर्घ आयु के लिए बाँधता हूँ; मोती की मणि तुम्हारी रक्षा करे।
The bone of the gods became pearl; it moves about, alive, within the waters. (To the wearer:) I bind it on you for life, splendour and strength, for long life of a hundred autumns; may the pearl amulet protect you.