ऋग्वेदRigvedaRV 6.11
अग्नि :
नीचे के भावार्थ AI से बने हैं और समीक्षा बाकी है।The meanings below are AI-generated and await review.
- १
यज॑स्व होतरिषि॒तो यजी॑या॒नग्ने॒ बाधो॑ म॒रुतां॒ न प्रयु॑क्ति ।आ नो॑ मि॒त्रावरु॑णा॒ नास॑त्या॒ द्यावा॑ हो॒त्राय॑ पृथि॒वी व॑वृत्याः
हे अग्नि, तुम होता हो — प्रेरित किए गए, सबसे अच्छे यज्ञकर्ता; आग्रह करते हुए, जैसे मरुतों की प्रेरणा से, यज्ञ करो। मित्र और वरुण को, नासत्यों (अश्विनों) को, और विशाल द्यावा-पृथिवी को हमारे इस होत्र-कर्म के लिए इधर ले आओ।
Sacrifice, hotar, now that you are urged on; Agni, you are the better sacrificer, like the thrust of the Maruts when they are yoked. Turn Mitra and Varuna, the Nasatyas, and Heaven and Earth here to our offering.
- २
त्वं होता॑ म॒न्द्रत॑मो नो अ॒ध्रुग॒न्तर्दे॒वो वि॒दथा॒ मर्त्ये॑षु ।पा॒व॒कया॑ जु॒ह्वा॒३॒॑ वह्नि॑रा॒साग्ने॒ यज॑स्व त॒न्वं१॒॑ तव॒ स्वाम्
तुम हमारे होता हो — सबसे आनन्ददायक, छल न करनेवाले; मनुष्यों के बीच यज्ञ-सभाओं में तुम ही देव हो। हे अग्नि, पवित्र करनेवाली जिह्वा से, मुख से हव्य ले जानेवाले बनकर, अपने ही शरीर का यजन करो।
You are our most delightful hotar, free of deceit, a god among mortals at the rites. Agni, as the one who carries the offerings, sacrifice to your own body with your purifying tongue, your mouth.
- ३
धन्या॑ चि॒द्धि त्वे धि॒षणा॒ वष्टि॒ प्र दे॒वाञ्जन्म॑ गृण॒ते यज॑ध्यै ।वेपि॑ष्ठो॒ अङ्गि॑रसां॒ यद्ध॒ विप्रो॒ मधु॑ च्छ॒न्दो भन॑ति रे॒भ इ॒ष्टौ
तुममें रहनेवाली समृद्धिकारिणी धिषणा (प्रेरक वाणी) यही चाहती है कि स्तोता के लिए देवों का, देव-कुल का यजन हो — जब अङ्गिरसों में सबसे वाक्-प्रवीण विप्र, वह गायक, इस इष्टि में मधुर छन्द का उच्चारण करता है।
For the prize-winning thought longs for you, Agni, so that you will sacrifice to the gods' lineage for the one who praises, when the inspired singer, most stirred of the Angirases, sounds out the sweet metre at the offering.
- ४
अदि॑द्युत॒त्स्वपा॑को वि॒भावाग्ने॒ यज॑स्व॒ रोद॑सी उरू॒ची ।आ॒युं न यं नम॑सा रा॒तह॑व्या अ॒ञ्जन्ति॑ सुप्र॒यसं॒ पञ्च॒ जनाः॑
सुकर्मा, दूर तक चमकनेवाला अग्नि प्रकाशित हो उठा है; हे अग्नि, विस्तृत दोनों लोकों (द्यावा-पृथिवी) का यजन करो। हव्य देनेवाले पाँचों जन जिसे आदर के साथ, किसी मनुष्य की तरह, घृत से अभ्यङ्ग करते हैं — वही तुम उत्तम भोजन से युक्त हो।
The shrewd one has blazed out, shining far. Agni, sacrifice to the two wide world-halves. Like Ayu, the five peoples who have given offerings anoint you with reverence, you who have fine food.
- ५
वृ॒ञ्जे ह॒ यन्नम॑सा ब॒र्हिर॒ग्नावया॑मि॒ स्रुग्घृ॒तव॑ती सुवृ॒क्तिः ।अम्य॑क्षि॒ सद्म॒ सद॑ने पृथि॒व्या अश्रा॑यि य॒ज्ञः सूर्ये॒ न चक्षुः॑
जब मैं आदर के साथ बर्हि (कुश) बिछाता हूँ, तब अग्नि के लिए घृत से भरी स्रुक् और सुन्दर स्तुति प्रस्तुत की जाती है। पृथ्वी के स्थान पर यज्ञ-आसन दृढ़ हो गया, और यज्ञ ऐसे स्थिर हुआ जैसे सूर्य में आँख (दृष्टि)।
When the ritual grass has been twisted with reverence for Agni, and the ghee-filled ladle, like a well-twisted hymn, has been held out, the seat has been set in the seat of the earth. The sacrifice has been fixed on its goal, as the eye is on the sun.
- ६
द॒श॒स्या नः॑ पुर्वणीक होतर्दे॒वेभि॑रग्ने अ॒ग्निभि॑रिधा॒नः ।रा॒यः सू॑नो सहसो वावसा॒ना अति॑ स्रसेम वृ॒जनं॒ नांहः॑
हे बहुमुख होता अग्नि, देवों के साथ और अपनी अग्नियों के साथ प्रज्वलित होकर हमें अनुग्रह दो। हे सहस् (बल) के पुत्र, धन से आवृत होकर हम संकट को ऐसे पार कर जाएँ जैसे कोई घेरे को पार कर निकल जाता है।
Grant gifts to us, hotar of many faces, Agni, kindled along with the divine fires. Son of strength, clothed in wealth, may we slip past distress as past an enclosure.