ऋग्वेदRigvedaRV 10.163
यक्ष्मनाशनम्
नीचे के भावार्थ AI से बने हैं और समीक्षा बाकी है।The meanings below are AI-generated and await review.
- १
अ॒क्षीभ्यां॑ ते॒ नासि॑काभ्यां॒ कर्णा॑भ्यां॒ छुबु॑का॒दधि॑ ।यक्ष्मं॑ शीर्ष॒ण्यं॑ म॒स्तिष्का॑ज्जि॒ह्वाया॒ वि वृ॑हामि ते
तेरी दोनों आँखों से, दोनों नथुनों से, दोनों कानों से और ठुड्डी से — तथा सिर में बैठे यक्ष्म (क्षयरोग) को मस्तिष्क और जीभ से — मैं उखाड़ कर बाहर निकालता हूँ।
From your eyes, from your nostrils, from your ears, from your chin, from your brain, from your tongue, I tear out the yakshma that is in your head.
- २
ग्री॒वाभ्य॑स्त उ॒ष्णिहा॑भ्यः॒ कीक॑साभ्यो अनू॒क्या॑त् ।यक्ष्मं॑ दोष॒ण्य१॒॑मंसा॑भ्यां बा॒हुभ्यां॒ वि वृ॑हामि ते
तेरी गर्दन से, गले की नसों से, पसलियों (या कशेरुकाओं) से, रीढ़ से — और दोनों भुजाओं, कंधों तथा बाहुओं में बैठे यक्ष्म को — मैं उखाड़ कर बाहर निकालता हूँ।
From your neck, from the sinews of your nape, from your vertebrae, from your spine, from your shoulders, from your arms, I tear out the yakshma of your forearms.
- ३
आ॒न्त्रेभ्य॑स्ते॒ गुदा॑भ्यो वनि॒ष्ठोर्हृद॑या॒दधि॑ ।यक्ष्मं॒ मत॑स्नाभ्यां य॒क्नः प्ला॒शिभ्यो॒ वि वृ॑हामि ते
तेरी अँतड़ियों से, मलाशय से, पेट के भीतरी भाग से, हृदय से — और गुर्दों, यकृत तथा आँतों में बैठे यक्ष्म को — मैं उखाड़ कर बाहर निकालता हूँ।
From your intestines, from your bowels, from your rectum, from your heart, from your kidneys, from your liver, from your spleen, I tear out the yakshma.
- ४
ऊ॒रुभ्यां॑ ते अष्ठी॒वद्भ्यां॒ पार्ष्णि॑भ्यां॒ प्रप॑दाभ्याम् ।यक्ष्मं॒ श्रोणि॑भ्यां॒ भास॑दा॒द्भंस॑सो॒ वि वृ॑हामि ते
तेरी दोनों जाँघों से, घुटनों से, एड़ियों से, पंजों से — और कमर, नितम्ब तथा गुदा-प्रदेश में बैठे यक्ष्म को — मैं उखाड़ कर बाहर निकालता हूँ।
From your thighs, from your knees, from your heels, from the fronts of your feet, from your hips, from your buttocks, from your genital region, I tear out the yakshma.
- ५
मेह॑नाद्वनं॒कर॑णा॒ल्लोम॑भ्यस्ते न॒खेभ्यः॑ ।यक्ष्मं॒ सर्व॑स्मादा॒त्मन॒स्तमि॒दं वि वृ॑हामि ते
तेरे मूत्र-अंग से, जननांग से, रोमों से और नाखूनों से — तेरी सारी देह में फैले उस यक्ष्म को — मैं यहीं उखाड़ कर बाहर निकालता हूँ।
From your penis, from your vanaṃkaraṇa, from your hairs, from your nails, from your whole body, I tear out this yakshma.
- ६
अङ्गा॑दङ्गा॒ल्लोम्नो॑लोम्नो जा॒तं पर्व॑णिपर्वणि ।यक्ष्मं॒ सर्व॑स्मादा॒त्मन॒स्तमि॒दं वि वृ॑हामि ते
हर अंग से, हर रोम से, हर जोड़ में जो उत्पन्न हुआ है — तेरी सारी देह में बैठे उस यक्ष्म को — मैं यहीं उखाड़ कर बाहर निकालता हूँ।
The yakshma that has arisen in every limb, in every hair, in every joint: from your whole body, I tear it out.