अथर्ववेदAtharvavedaAV 7.79
अमावास्या की स्तुतिPraise of the New-Moon Night
नीचे के भावार्थ AI से बने हैं और समीक्षा बाकी है।The meanings below are AI-generated and await review.
- १
यत् ते देवा अकृण्वन् भागधेयम् अमावास्ये संवसन्तो महित्वा ।तेना नो यज्ञं पिपृहि विश्ववारे रयिं नो धेहि सुभगे सुवीरम्
हे अमावास्या, अपनी महिमा से एक साथ बसते हुए देवों ने तुम्हारा जो भाग नियत किया, उसी से हमारे यज्ञ को पूर्ण करो। हे सबके द्वारा वरणीय, हे सौभाग्यवती, हमें उत्तम वीरों (पुत्रों) से युक्त धन दो।
O Amavasya, with the share that the gods, dwelling together in their greatness, assigned to you, fulfil our sacrifice. O one desired by all, O fortunate one, give us wealth with good heroes.
- २
अहम् एवास्म्य् अमावास्या᳙ माम् आ वसन्ति सुक्ŕ̥तो मयीमे ।मयि देवा उभये साद्याश् चेन्द्रज्येष्ठाः सम् अगछन्त सर्वे
मैं ही अमावास्या हूँ; ये पुण्यकर्मा मुझमें आकर बसते हैं। मुझमें दोनों प्रकार के देव — साध्य और इन्द्र को प्रमुख माननेवाले — सब एकत्र हुए।
I alone am Amavasya; these doers of good deeds come to dwell in me. In me the gods of both kinds, the Sadhyas and those with Indra at their head, all came together.
- ३
आगन् रात्री सङ्गमनी वसूनाम् ऊर्जं पुष्टं वस्व् आवेशयन्ती ।अमावास्या᳙यै हविष विधेमोर्जं दुहाना पयसा न आगन्
धनों को एकत्र करनेवाली रात्रि आ गई है, जो ऊर्जा, पुष्टि और धन को भीतर प्रवेश कराती है। हम अमावास्या की हवि से पूजा करें; दूध के साथ ऊर्जा दुहती हुई वह हमारे पास आई है।
The night has come, the gatherer of goods, bringing in strength, prosperity and wealth. Let us worship Amavasya with oblation; milking out strength along with milk, she has come to us.
- ४
अमावास्ये न त्वद् एतान्य् अन्यो विश्वा रूपाणि परिभूर् जजान ।यत्कामास् ते जुहुमस् तन् नो अस्तु वयं स्याम पतयो रयिणाम्
हे अमावास्या, तुम्हारे सिवा किसी दूसरे ने सबको घेरकर ये सारे रूप उत्पन्न नहीं किए। जिस कामना से हम तुम्हें आहुति देते हैं, वह हमें मिले; हम धनों के स्वामी हों।
O Amavasya, no one other than you, encompassing them all, has brought all these forms into being. May what we desire in offering to you be ours; may we be lords of riches.