अथर्ववेदAtharvavedaAV 5.10

दिशाओं से रक्षा का कवचStone armour against attack from every quarter

नीचे के भावार्थ AI से बने हैं और समीक्षा बाकी है।The meanings below are AI-generated and await review.

  1. १

    अश्मवर्म मे ऽसि यो मा प्राच्या दिशो ऽघायुर् अभिदासात् ।एतत् स ऋछात्

    तुम मेरे लिए पत्थर का कवच हो। जो बुरा चाहने वाला पूर्व दिशा से मुझ पर आक्रमण करे, वह इसी से टकराए।

    You are a stone armour for me. Whoever, meaning harm, attacks me from the eastern quarter, let him run into this.

  2. २

    अश्मवर्म मे ऽसि यो मा दक्षिणाया दिशो ऽघायुर् अभिदासात् ।एतत् स ऋछात्

    तुम मेरे लिए पत्थर का कवच हो। जो बुरा चाहने वाला दक्षिण दिशा से मुझ पर आक्रमण करे, वह इसी से टकराए।

    You are a stone armour for me. Whoever, meaning harm, attacks me from the southern quarter, let him run into this.

  3. ३

    अश्मवर्म मे ऽसि यो मा प्रतीच्या दिशो ऽघायुर् अभिदासात् ।एतत् स ऋछात्

    तुम मेरे लिए पत्थर का कवच हो। जो बुरा चाहने वाला पश्चिम दिशा से मुझ पर आक्रमण करे, वह इसी से टकराए।

    You are a stone armour for me. Whoever, meaning harm, attacks me from the western quarter, let him run into this.

  4. ४

    अश्मवर्म मे ऽसि यो मोदीच्या दिशो ऽघायुर् अभिदासात् ।एतत् स ऋछात्

    तुम मेरे लिए पत्थर का कवच हो। जो बुरा चाहने वाला उत्तर दिशा से मुझ पर आक्रमण करे, वह इसी से टकराए।

    You are a stone armour for me. Whoever, meaning harm, attacks me from the northern quarter, let him run into this.

  5. ५

    अश्मवर्म मे ऽसि यो मा ध्रुवाया दिशो ऽघायुर् अभिदासात् ।एतत् स ऋछात्

    तुम मेरे लिए पत्थर का कवच हो। जो बुरा चाहने वाला ध्रुवा (नीचे की) दिशा से मुझ पर आक्रमण करे, वह इसी से टकराए।

    You are a stone armour for me. Whoever, meaning harm, attacks me from the fixed quarter below, let him run into this.

  6. ६

    अश्मवर्म मे ऽसि यो मोर्ध्वाया दिशो ऽघायुर् अभिदासात् ।एतत् स ऋछात्

    तुम मेरे लिए पत्थर का कवच हो। जो बुरा चाहने वाला ऊपर की दिशा से मुझ पर आक्रमण करे, वह इसी से टकराए।

    You are a stone armour for me. Whoever, meaning harm, attacks me from the upward quarter, let him run into this.

  7. ७

    अश्मवर्म मे ऽसि यो मा दिशाम् अन्तर्देशेभ्यो ऽघायुर् अभिदासात् ।एतत् स ऋछात्

    तुम मेरे लिए पत्थर का कवच हो। जो बुरा चाहने वाला दिशाओं के बीच के कोणों से मुझ पर आक्रमण करे, वह इसी से टकराए।

    You are a stone armour for me. Whoever, meaning harm, attacks me from the regions between the quarters, let him run into this.

  8. ८

    बृहता मन उप ह्वये मातरिश्वना प्राणापानौ ।सूर्याच् चक्षुर् अन्तरिक्षाच् छ्रोत्रं पृथिव्याः शरीरम् ।सरस्वत्या वाचम् उप ह्वयामहे मनोयुजा

    मैं बृहत् के साथ मन को, मातरिश्वन् के साथ प्राण और अपान को बुलाता हूँ; सूर्य से आँख, अन्तरिक्ष से कान और पृथिवी से शरीर को। मन से जुड़ी सरस्वती के साथ हम वाणी को बुलाते हैं।

    With the Great One I call up mind, and with Matarishvan the in-breath and out-breath; from the sun the eye, from the mid-air the ear, from the earth the body. With Sarasvati, yoked to mind, we call up speech.