अथर्ववेदAtharvavedaAV 19.43

ब्रह्मविदों के लोक की प्रार्थनाPrayer to reach the Brahman-knowers' world

नीचे के भावार्थ AI से बने हैं और समीक्षा बाकी है।The meanings below are AI-generated and await review.

  1. १

    यत्र ब्रह्मविदो यान्ति दीक्षया तपसा सह ।अग्निर् मा तत्र नयत्व् अग्निर् मेधा दधातु मे ।अग्नये स्वाहा

    जहाँ ब्रह्म के ज्ञाता दीक्षा और तप के साथ जाते हैं, अग्नि मुझे वहाँ ले जाए; अग्नि मुझमें मेधा (बुद्धि) स्थापित करे। अग्नि के लिए स्वाहा।

    Where those who know the brahman go, with consecration and austerity, may Agni lead me there; may Agni place wisdom in me. To Agni, svāhā.

  2. २

    यत्र ब्रह्मविदो यान्ति दीक्षया तपसा सह ।वायुर् मा तत्र नयतु वायुः प्रणान् दधातु मे वायवे स्वाहा

    जहाँ ब्रह्म के ज्ञाता दीक्षा और तप के साथ जाते हैं, वायु मुझे वहाँ ले जाए; वायु मुझमें प्राण स्थापित करे। वायु के लिए स्वाहा।

    Where those who know the brahman go, with consecration and austerity, may Vayu lead me there; may Vayu place the breaths in me. To Vayu, svāhā.

  3. ३

    यत्र ब्रह्मविदो यान्ति दीक्षया तपसा सह ।सूर्यो मा तत्र नयतु चक्षुः सूर्यो दधातु मे ।सूर्याय स्वाहा

    जहाँ ब्रह्म के ज्ञाता दीक्षा और तप के साथ जाते हैं, सूर्य मुझे वहाँ ले जाए; सूर्य मुझमें दृष्टि स्थापित करे। सूर्य के लिए स्वाहा।

    Where those who know the brahman go, with consecration and austerity, may Surya lead me there; may Surya place sight in me. To Surya, svāhā.

  4. ४

    यत्र ब्रह्मविदो यान्ति दीक्षया तपसा सह ।चन्द्रो मा तत्र नयतु मनश् चन्द्रो दधातु मे ।चन्द्राय स्वाहा

    जहाँ ब्रह्म के ज्ञाता दीक्षा और तप के साथ जाते हैं, चन्द्र मुझे वहाँ ले जाए; चन्द्र मुझमें मन स्थापित करे। चन्द्र के लिए स्वाहा।

    Where those who know the brahman go, with consecration and austerity, may Chandra, the moon, lead me there; may Chandra place mind in me. To Chandra, svāhā.

  5. ५

    यत्र ब्रह्मविदो यान्ति दीक्षया तपसा सह ।सोमो मा तत्र नयतु पयः सोमो दधातु मे ।सोमाय स्वाहा

    जहाँ ब्रह्म के ज्ञाता दीक्षा और तप के साथ जाते हैं, सोम मुझे वहाँ ले जाए; सोम मुझमें पयस् (दूध/रस) स्थापित करे। सोम के लिए स्वाहा।

    Where those who know the brahman go, with consecration and austerity, may Soma lead me there; may Soma place milk in me. To Soma, svāhā.

  6. ६

    यत्र ब्रह्मविदो यान्ति दीक्षया तपसा सह ।इन्द्रो मा तत्र नयतु बलम् इन्द्रो दधातु मे ।इन्द्राय स्वाहा

    जहाँ ब्रह्म के ज्ञाता दीक्षा और तप के साथ जाते हैं, इन्द्र मुझे वहाँ ले जाए; इन्द्र मुझमें बल स्थापित करे। इन्द्र के लिए स्वाहा।

    Where those who know the brahman go, with consecration and austerity, may Indra lead me there; may Indra place strength in me. To Indra, svāhā.

  7. ७

    यत्र ब्रह्मविदो यान्ति दीक्षया तपसा सह ।आपो मा तत्र नयत्व् अम्ŕ̥तम् मोप तिष्ठतु ।अद्भ्यः स्वाहा

    जहाँ ब्रह्म के ज्ञाता दीक्षा और तप के साथ जाते हैं, जल मुझे वहाँ ले जाएँ; अमृत (अमरत्व) मेरे पास उपस्थित रहे। जलों के लिए स्वाहा।

    Where those who know the brahman go, with consecration and austerity, may the Waters lead me there; may immortality attend me. To the Waters, svāhā.

  8. ८

    यत्र ब्रह्मविदो यान्ति दीक्षया तपसा सह ।ब्रह्मा मा तत्र नयतु ब्रह्मा ब्रह्म दधातु मे ।ब्रह्मणे स्वाहा

    जहाँ ब्रह्म के ज्ञाता दीक्षा और तप के साथ जाते हैं, ब्रह्मा मुझे वहाँ ले जाए; ब्रह्मा मुझमें ब्रह्म स्थापित करे। ब्रह्मा के लिए स्वाहा।

    Where those who know the brahman go, with consecration and austerity, may Brahmā lead me there; may Brahmā place the brahman in me. To Brahmā, svāhā.