१हरि॑रसि हारियोज॒नो हऱ्यो᳚ः स्था॒ता वज्र॑स्य भ॒र्ता पृश्ञे᳚ः प्रे॒ता तस्य॑ ते देव सोमे॒ष्टय॑जुषः स्तु॒तस्तो॑मस्य श॒स्तोक्थ॑स्य॒ हरि॑वन्तं॒ ग्रहं॑ गृह्णामि ह॒रीः स्थ॒ हऱ्यो᳚र्धा॒नाः स॒ह सो॑मा॒ इन्द्रा॑य॒ स्वाहा᳚ ॥ हरिः॒ षड्विं॑शतिः
तुम हरि हो, हरि घोड़ों को जोतने वाले, दोनों हरि घोड़ों पर खड़े होने वाले, वज्र धारण करने वाले, पृश्नि के प्रेमी। हे देव सोम, जिसका यजुस् से यजन हो चुका है, जिसका स्तोम गाया जा चुका है और उक्थ पढ़ा जा चुका है, ऐसे तुम्हारा हरि घोड़ों वाला ग्रह मैं भरता हूँ। (अब धाना से:) तुम हरि हो, दोनों हरि घोड़ों के भुने जौ; सोम के साथ इन्द्र के लिए स्वाहा।
You are the bay one, the yoker of the bays, who stands on the two bays, bearer of the vajra, lover of Prishni. O god Soma, you whose yajus has been offered, whose stoma has been sung and whose uktha recited, I draw your cup with the bays; (To the grains:) you are the bay ones, the grains of the two bays: together with the soma, to Indra, svaha!