अथर्ववेदAtharvavedaAV 20.110

सोम-पान पर इन्द्र की स्तुतिPraise of Indra at the soma pressing

नीचे के भावार्थ AI से बने हैं और समीक्षा बाकी है।The meanings below are AI-generated and await review.

  1. १

    इन्द्राय मदूने सुतं परि ष्टोभन्तु नो गिरः ।अर्कम् अर्चन्तु कारवः

    हमारी वाणियाँ आनन्द से भरे इन्द्र के लिए निचोड़े गए सोम के चारों ओर स्तुति गाएँ। गायक अर्क (स्तुति-गीत) गाएँ।

    Let our songs ring out around the soma pressed for Indra, the joyful one. Let the singers sing a song of praise.

  2. २

    यस्मिन् विश्वा अधि श्रियो रणन्ति सप्त संसदः ।इन्द्रं सुते हवामहे

    जिसमें सारी शोभाएँ टिकी हैं और जिसमें सात सभाएँ आनन्द मनाती हैं, उस इन्द्र को हम सोम निचोड़े जाने पर बुलाते हैं।

    Indra, in whom all splendours rest and in whom the seven assemblies rejoice, we call when the soma is pressed.

  3. ३

    त्रिकद्रुकेषु चेतनं देवासो यज्ञम् अत्नत ।तम् इद् वर्धन्तु नो गिरः

    त्रिकद्रुकों में देवताओं ने जागृत करने वाला यज्ञ फैलाया। हमारी वाणियाँ उसी को बढ़ाएँ।

    At the Trikadrukas the gods spread out the yajna that awakens. Let our songs make it grow.