यजुर्वेदYajurvedaTS 5.7.20

अश्व के अंगों की आहुतिOffering the horse's body parts

नीचे के भावार्थ AI से बने हैं और समीक्षा बाकी है।The meanings below are AI-generated and await review.

  1. १

    अह॑र्मां॒॒सेन॒ रात्रिं॒ पीव॑सा॒पो यू॒षेण॑ घृ॒तं रसे॑न॒ श्यां वस॑या दू॒षीका॑भिर्ह्रा॒दुनि॒मश्रु॑भिः॒ पृष्वां॒ दिवं॑ रू॒पेण॒ नक्ष॑त्राणि॒ प्रति॑रूपेण पृथि॒वीं चर्म॑णा छ॒वीं छ॒व्यो॑पाकृ॑ताय॒ स्वाहाल॑ब्धाय॒ स्वाहा॑ हु॒ताय॒ स्वाहा᳚ अह॑र॒ष्टा विं॑शतिः ॥

    (अश्व के) मांस से अहर् (दिन) को, चर्बी से रात्रि को, शोरबे से जल को, रस से घृत को, वसा से श्या (पाला?) को, आँख के कीचड़ से ह्रादुनि (ओले) को, आँसुओं से पृष्वा (फुहार?) को, रूप से द्यौ को, प्रतिरूप से नक्षत्रों को, चर्म से पृथिवी को, छवि से छवि को (तृप्त करता हूँ)। जिसे (यज्ञ के लिए) अलग किया गया, उसके लिए स्वाहा; जिसे पकड़ा (मारा) गया, उसके लिए स्वाहा; जिसकी आहुति दी गई, उसके लिए स्वाहा।

    [I satisfy] Day with [the horse's] flesh, Night with its fat, the Waters with its broth, ghee with its juice, śyā (frost?) with its marrow-fat, hail with the rheum of its eyes, pṛṣvā (drizzle?) with its tears, the sky with its form, the stars with its likeness, the earth with its hide, skin with skin. Svāhā to the one set apart, svāhā to the one seized, svāhā to the one offered.