१प्र॒या॒साय॒ स्वाहाऽऽ॑या॒साय॒ स्वाहा॑ विया॒साय॒ स्वाहा॑ संया॒साय॒ स्वाहो᳚द्या॒साय॒ स्वाहाऽ॑वया॒साय॒ स्वाहा॑ शु॒चे स्वाहा॒ शोका॑य॒ स्वाहा॑ तप्य॒त्वै स्वाहा॒ तप॑ते॒ स्वाहा᳚ ब्रह्मह॒त्यायै॒ स्वाहा॒ सर्व॑स्मै॒ स्वाहा᳚ ॥ प्र॒या॒साय॒ चतु॑र्विंशतिः
प्रयास (आगे जाने) को स्वाहा, आयास (पास आने) को स्वाहा, वियास (अलग जाने) को स्वाहा, संयास (साथ आने) को स्वाहा, उद्यास (ऊपर जाने) को स्वाहा, अवयास (नीचे जाने) को स्वाहा; शुच् (दाह) को स्वाहा, शोक (जलन) को स्वाहा, तपने को स्वाहा, तपते हुए को स्वाहा; ब्रह्महत्या (के पाप) को स्वाहा, सबको स्वाहा। [इस खण्ड का आरम्भ 'प्रयासाय' से होता है, इसमें चौबीस पद हैं।]
To going-forth, svāhā; to coming-near, svāhā; to going-apart, svāhā; to coming-together, svāhā; to going-up, svāhā; to going-down, svāhā; to glow, svāhā; to burning, svāhā; to being scorched, svāhā; to the one who scorches, svāhā; to (the sin of) the killing of a brahmin, svāhā; to all, svāhā. [Section beginning 'prayāsāya': twenty-four words.]