अथर्ववेदAtharvavedaAV 19.29

शत्रुनाश के लिए दर्भमणिDarbha amulet against enemies

नीचे के भावार्थ AI से बने हैं और समीक्षा बाकी है।The meanings below are AI-generated and await review.

  1. १

    निक्ष दर्भ सपत्नान् मे निक्ष मे पृतनायतः ।निक्ष मे सर्वान् दुर्हार्दो निक्ष मे द्विषतो मणे

    हे दर्भ, मेरे प्रतिद्वन्द्वियों को बेध दो, मुझसे युद्ध करने वालों को बेध दो। हे मणि, मेरे सभी दुष्ट-हृदय वालों को और मुझसे द्वेष करने वालों को बेध दो।

    Darbha, pierce my rivals, pierce those who attack me. Amulet, pierce all who wish me ill, pierce those who hate me.

  2. २

    तृन्द्धि दर्भ सपत्नान् मे तृन्द्धि मे पृतनायतः ।तृन्द्धि मे सर्वान् दुर्हार्दो तृन्द्धि मे द्विषतो मणे

    हे दर्भ, मेरे प्रतिद्वन्द्वियों को चीर डालो, मुझसे युद्ध करने वालों को चीर डालो। हे मणि, मेरे सभी दुष्ट-हृदय वालों को और मुझसे द्वेष करने वालों को चीर डालो।

    Darbha, split my rivals, split those who attack me. Amulet, split all who wish me ill, split those who hate me.

  3. ३

    रुन्द्धि दर्भ सपत्नान् मे रुन्द्धि मे पृतनायतः ।रुन्द्धि मे सर्वान् दुर्हार्दो रुन्द्धि मे द्विषतो मणे

    हे दर्भ, मेरे प्रतिद्वन्द्वियों को रोक दो, मुझसे युद्ध करने वालों को रोक दो। हे मणि, मेरे सभी दुष्ट-हृदय वालों को और मुझसे द्वेष करने वालों को रोक दो।

    Darbha, block my rivals, block those who attack me. Amulet, block all who wish me ill, block those who hate me.

  4. ४

    मृण दर्भ सपत्नान् मे मृण मे पृतनायतः ।मृण मे सर्वान् दुर्हार्दो मृण मे द्विषतो मणे

    हे दर्भ, मेरे प्रतिद्वन्द्वियों को कुचल दो, मुझसे युद्ध करने वालों को कुचल दो। हे मणि, मेरे सभी दुष्ट-हृदय वालों को और मुझसे द्वेष करने वालों को कुचल दो।

    Darbha, crush my rivals, crush those who attack me. Amulet, crush all who wish me ill, crush those who hate me.

  5. ५

    मन्थ दर्भ सपत्नान् मे मन्थ मे पृतनायतः ।मन्थ मे सर्वान् दुर्हार्दो मन्थ मे द्विषतो मणे

    हे दर्भ, मेरे प्रतिद्वन्द्वियों को मथ डालो, मुझसे युद्ध करने वालों को मथ डालो। हे मणि, मेरे सभी दुष्ट-हृदय वालों को और मुझसे द्वेष करने वालों को मथ डालो।

    Darbha, churn up my rivals, churn up those who attack me. Amulet, churn up all who wish me ill, churn up those who hate me.

  6. ६

    पिण्ड्ढि दर्भ सपत्नान् मे पिण्ड्ढि मे पृतनायतः ।पिण्ड्ढि मे सर्वान् दुर्हार्दो पिण्ड्ढि मे द्विषतो मणे

    हे दर्भ, मेरे प्रतिद्वन्द्वियों को पीस डालो, मुझसे युद्ध करने वालों को पीस डालो। हे मणि, मेरे सभी दुष्ट-हृदय वालों को और मुझसे द्वेष करने वालों को पीस डालो।

    Darbha, grind my rivals, grind those who attack me. Amulet, grind all who wish me ill, grind those who hate me.

  7. ७

    ओष दर्भ सपत्नान् मे ओष मे पृतनायतः ।ओष मे सर्वान् दुर्हार्दो ओष मे द्विषतो मणे

    हे दर्भ, मेरे प्रतिद्वन्द्वियों को झुलसा दो, मुझसे युद्ध करने वालों को झुलसा दो। हे मणि, मेरे सभी दुष्ट-हृदय वालों को और मुझसे द्वेष करने वालों को झुलसा दो।

    Darbha, scorch my rivals, scorch those who attack me. Amulet, scorch all who wish me ill, scorch those who hate me.

  8. ८

    दह दर्भ सपत्नान् मे दह मे पृतनायतः ।दह मे सर्वान् दुर्हार्दो दह मे द्विषतो मणे

    हे दर्भ, मेरे प्रतिद्वन्द्वियों को जला दो, मुझसे युद्ध करने वालों को जला दो। हे मणि, मेरे सभी दुष्ट-हृदय वालों को और मुझसे द्वेष करने वालों को जला दो।

    Darbha, burn my rivals, burn those who attack me. Amulet, burn all who wish me ill, burn those who hate me.

  9. ९

    जहि दर्भ सपत्नान् मे जहि मे पृतनायतः ।जहि मे सर्वान् दुर्हार्दो जहि मे द्विषतो मणे

    हे दर्भ, मेरे प्रतिद्वन्द्वियों को मार डालो, मुझसे युद्ध करने वालों को मार डालो। हे मणि, मेरे सभी दुष्ट-हृदय वालों को और मुझसे द्वेष करने वालों को मार डालो।

    Darbha, kill my rivals, kill those who attack me. Amulet, kill all who wish me ill, kill those who hate me.