यजुर्वेदYajurvedaTS 7.5.11

अनुवाक 11Anuvaka 11

  1. १

    पृ॒थि॒व्यै स्वाहा॒न्तरि॑क्षाय॒ स्वाहा॑ दि॒वे स्वाहा॑ सं प्लोष्य॒ते स्वाहा॑ सं॒ प्लव॑मानाय॒ स्वाहा॒ सं प्लु॑ताय॒ स्वाहा॑ मेधायिष्य॒ते स्वाहा॑ मेघाय॒ते स्वाहा॑ मेघि॒ताय॒ स्वाहा॑ मे॒घाय॒ स्वाहा॑ नीहा॒राय॒ स्वाहा॑ नि॒हाका॑यै॒ स्वाहा᳚ प्रास॒चाय॒ स्वाहा᳚ प्रच॒लाका॑यै॒ स्वाहा॑ विद्योतिष्य॒ते स्वाहा॑ वि॒द्योत॑मानाय॒ स्वाहा॑ सं वि॒द्योत॑मानाय॒ स्वाहा᳚ स्तनयिष्य॒ते स्वाहा᳚ स्त॒नय॑ते॒ स्वाहो॒ग्र२ं स्त॒नय॑ते॒ स्वाहा॑ वर्षिष्य॒ते स्वाहा॒ वर्ष॑ते॒ स्वाहा॑भि॒वर्ष॑ते॒ स्वाहा॑ परि॒वर्ष॑ते॒ स्वाहा॑ सं॒वर्ष॑ते॒ ३४ स्वाहा॑नु॒वर्ष॑ते॒ स्वाहा॑ शीकायिष्य॒ते स्वाहा॑ शीकाय॒ते स्वाहा॑ शीकि॒ताय॒ स्वाहा᳚ प्रोषिष्य॒ते स्वाहा᳚ प्रुष्ण॒ते स्वाहा॑ परिप्रुष्ण॒ते स्वाहो᳚द्ग्रहीष्य॒ते स्वाहो᳚द्गृह्ण॒ते स्वाहोद्गृ॑हीताय॒ स्वाहा॑ विप्लोष्य॒ते स्वाहा॑ वि॒प्लव॑मानाय॒ स्वाहा॒ विप्लु॑ताय॒ स्वाहा॑तप्स्य॒ते स्वाहाऽ॒तप॑ते॒ स्वाहो॒ग्रमा॒तप॑ते॒ स्वाह॒र्ग्भ्यः स्वाहा॒ यजु॑र्भ्यः॒ स्वाहा॒ साम॑भ्यः॒ स्वाहांगि॑रोभ्यः॒ स्वाहा॒ वेदे᳚भ्यः॒ स्वाहा॒ गाथा᳚भ्यः॒ स्वाहा॑ नाराशं॒॒सीभ्यः॒ स्वाहा॒ रैभी᳚भ्यः॒ स्वाहा॒ सर्व॑स्मै॒ स्वाहा᳚ सं॒वर्ष॑ते॒ रैभी᳚भ्यः॒ स्वाहा॒ द्वे च॑