यजुर्वेदYajurvedaTS 7.4.22
७। ४। २१॥ ५३ सि॒ताय॒ स्वाहासि॑ताय॒ स्वाहा॒भिहि॑ताय॒ स्वाहान॑भिहिताय॒ स्वाहा॑ यु॒क्ताय॒ स्वाहायु॑क्ताय॒ स्वाहा॒ सुयु॑क्ताय॒ स्वाहोद्यु॑क्ताय॒ स्वाहा॒ विमु॑क्ताय॒ स्वाहा॒ प्रमु॑क्ताय॒ स्वाहा॒ वञ्च॑ते॒ स्वाहा॑ परि॒वञ्च॑ते॒ स्वाहा॑ सं॒वञ्च॑ते॒ स्वाहा॑नु॒वञ्च॑ते॒ स्वाहो॒द्वञ्च॑ते॒ स्वाहा॑ य॒ते स्वाहा॒ धाव॑ते॒ स्वाहा॒ तिष्ठ॑ते॒ स्वाहा॒ सर्व॑स्मै॒ स्वाहा᳚ सि॒ताया॒ष्टा त्रिं॑शत्