१मि॒त्रं दे॒वा अ॑ब्रुव॒न्थ्सोमं॒॒ राजा॑नं हना॒मेति॒ सो᳚ऽब्रवी॒न्नाहं सर्व॑स्य॒ वा अ॒हं मि॒त्रम॒स्मीति॒ तम॑ब्रुव॒न् हना॑मै॒वेति॒ सो᳚ऽब्रवी॒द्वरं॑ वृणै॒ पय॑सै॒व मे॒ सोमग्ग्॑ श्रीण॒न्निति॒ तस्मा᳚न्मैत्रावरु॒णं पय॑सा श्रीणन्ति॒ तस्मा᳚त्प॒शवोऽपा᳚क्रामन्मि॒त्रः सन्क्रू॒रम॑क॒रिति॑ क्रू॒रमि॑व॒ खलु॒ वा ए॒ष ३५ क॑रोति॒ यः सोमे॑न॒ यज॑ते॒ तस्मा᳚त्प॒शवोऽप॑ क्रामन्ति॒ यन्मै᳚त्रावरु॒णं पय॑सा श्री॒णाति॑ प॒शुभि॑रे॒व तन्मि॒त्रं स॑म॒र्धय॑ति प॒शुभि॒र्यज॑मानं पु॒रा खलु॒ वावैवं मि॒त्रोऽ॑वे॒दप॒मत्क्रू॒रं च॒क्रुषः॑ प॒शवः॑ क्रमिष्य॒न्तीति॒ तस्मा॑दे॒वम॑वृणीत॒ वरु॑णं दे॒वा अ॑ब्रुव॒न्त्वयां॑श॒भुवा॒ सोमं॒॒ राजा॑नं हना॒मेति॒ सो᳚ऽब्रवी॒द्वरं॑ वृणै॒ मह्यं॑ चै॒ ३६ वैष मि॒त्राय॑ च स॒ह गृ॑ह्याता॒ इति॒ तस्मा᳚न्मैत्रावरु॒णः स॒ह गृ॑ह्यते॒ तस्मा॒द्राज्ञा॒ राजा॑नमंश॒भुवा᳚ घ्नन्ति॒ वैश्ये॑न॒ वैश्यं॑ शू॒द्रेण॑ शू॒द्रं न वा इ॒दं दिवा॒ न नक्त॑मासी॒दव्या॑वृत्तं॒ ते दे॒वा मि॒त्रावरु॑णावब्रुवन्नि॒दं नो॒ वि वा॑सयत॒मिति॒ ताव॑ब्रूतां॒ वरं॑ वृणावहा॒ एक॑ ए॒वावत्पूर्वो॒ ग्रहो॑ गृह्याता॒ इति॒ तस्मा॑दैन्द्रवाय॒वः पूर्वो॑ मैत्रावरु॒णाद्गृ॑ह्यते प्राणापा॒नौ ह्ये॑तौ यदु॑पाग्श्वन्तर्या॒मौ मि॒त्रोऽहरज॑नय॒द्वरु॑णो॒ रात्रिं॒ ततो॒ वा इ॒दं व्यौ᳚च्छ॒द्यन्मै᳚त्रावरु॒णो गृ॒ह्यते॒ व्यु॑ष्ट्यै ए॒ष चै᳚न्द्रवाय॒वो द्वाविं॑शतिश्च
यह गद्य बताता है कि मैत्रावरुण ग्रह (प्याला) दूध मिलाकर क्यों तैयार किया जाता है, मित्र और वरुण के लिए एक साथ क्यों लिया जाता है, और ऐन्द्रवायव ग्रह के बाद ही क्यों लिया जाता है। देवों ने मित्र से कहा, 'हम राजा सोम को मारेंगे।' मित्र ने मना किया, क्योंकि वह सबका मित्र है, पर देव नहीं माने। तब मित्र ने वर माँगा कि उसके लिए सोम दूध से तैयार किया जाए, इसलिए मैत्रावरुण ग्रह दूध के साथ तैयार किया जाता है। पशु मित्र को छोड़कर चले गए, यह कहकर कि 'मित्र होकर इसने क्रूर काम किया।' सोम-यज्ञ करने वाला भी मानो क्रूर काम करता है, इसलिए पशु उसे छोड़ जाते हैं। दूध मिलाने से वह मित्र को और यजमान को फिर पशुओं से सम्पन्न करता है। मित्र यह पहले से जानता था, इसीलिए उसने यह वर माँगा। देवों ने वरुण से कहा, 'तुम्हें सहभागी बनाकर हम राजा सोम को मारेंगे।' वरुण ने वर माँगा कि यह ग्रह उसके और मित्र के लिए साथ-साथ लिया जाए, इसलिए मैत्रावरुण ग्रह एक साथ लिया जाता है। इसी कारण राजा को राजा की सहायता से मारते हैं, वैश्य को वैश्य से, शूद्र को शूद्र से। पहले न दिन था न रात, सब अविभक्त था। देवों ने मित्र-वरुण से कहा, 'इसे हमारे लिए प्रकाशित करो।' उन्होंने वर माँगा कि उनसे पहले केवल एक ग्रह लिया जाए, इसलिए ऐन्द्रवायव ग्रह मैत्रावरुण से पहले लिया जाता है; उपांशु और अन्तर्याम तो प्राण और अपान हैं। मित्र ने दिन उत्पन्न किया, वरुण ने रात, तभी यह जगत् प्रकाशित हुआ। मैत्रावरुण ग्रह प्रकाश होने (व्युष्टि) के लिए लिया जाता है।
This prose explains three things about the Maitravaruna cup: why it is mixed with milk, why it is drawn for Mitra and Varuna together, and why it comes after the Aindravayava cup. The gods said to Mitra, 'Let us kill King Soma.' Mitra refused, saying he is the friend of all, but the gods insisted. Mitra then chose a boon: that Soma be mixed with milk for him. That is why the Maitravaruna cup is mixed with milk. The cattle left him, saying, 'He did a cruel thing, though he is a friend.' Whoever sacrifices with Soma does something cruel, as it were, and so cattle leave him. By mixing the Maitravaruna cup with milk, he restores cattle to Mitra and to the sacrificer. Mitra had known this beforehand, and that is why he chose that boon. The gods said to Varuna, 'With you as our partner, let us kill King Soma.' Varuna chose a boon: that this cup be drawn for him and Mitra together. That is why the Maitravaruna cup is drawn jointly, and why a king is killed with a king's help, a vaishya with a vaishya's, and a shudra with a shudra's. At first there was neither day nor night; everything was undivided. The gods said to Mitra and Varuna, 'Make this dawn for us.' The two chose a boon: that only one cup be drawn before theirs. That is why the Aindravayava cup is drawn before the Maitravaruna, since the Upamshu and Antaryama cups count as the in-breath and out-breath. Mitra produced the day and Varuna the night, and then this world dawned. The Maitravaruna cup is drawn to bring the dawn.